पाक से हर दिन षडयंत्र की सूचना: मनमोहन

  • 20 नवंबर 2009
मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने तालेबान के ख़िलाफ़ लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका पर अपने बेबाक विचार रखे हैं

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि उन्हें हर दिन ख़ुफ़िया सूचना मिलती है कि पाकिस्तान के आतंकवादी कैंप में मुंबई जैसे हमलों का षडयंत्र रचा जा रहा है.

मुंबई के हमले का षडयंत्र रचने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के बारे में उनका कहना है कि पाकिस्तान ने कुछ क़दम उठाए तो हैं लेकिन वो पर्याप्त नहीं हैं.

अपनी अमरीका यात्रा से पहले वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार को दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका और पाकिस्तान का लक्ष्य एक ही है.

मनमोहन सिंह 21 नवंबर को एक हफ़्ते की अमरीका यात्रा पर जा रहे हैं. वहाँ उनकी मुलाक़ात राष्ट्रपति बराक ओबामा के अलावा कई बड़े अधिकारियों से होनी है.

पाकिस्तान की स्थिति पर चिंता

पाकिस्तान में परिस्थितियों के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा है कि भारत 'पाकिस्तान में आतंकवाद की स्थिति' से चिंतित है.

उन्होंने कहा, "हम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से लंबे समय से पीड़ित रहे हैं. तालेबान और अल-क़ायदा की आतंकवादी गतिविधियाँ पहले स्वायत्तशासी इलाक़े फ़ाटा तक ही सीमित थीं. अब पाकिस्तान के शहरी इलाक़ों में भी ऐसा हो रहा है. मेरे ख़याल से हमारे लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे."

मनमोहन सिंह ने कहा, "हम नहीं चाहते कि आतंकवाद ऐसी स्थिति तक पहुँच जाए जहाँ चुनी हुई सरकार नाममात्र की सरकार रह जाए."

उन्होंने कहा कि भारत लगभग 25 साल से 'पाकिस्तान समर्थित और प्रेरित आतंकवाद' का शिकार रहा है और वह चाहता है कि अमरीका अपने पूरे प्रभाव का इस्तेमाल करके पाकिस्तान को इस रास्ते पर चलने से रोके.

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को भारत से डरने की ज़रूरत नहीं है लेकिन यह त्रासदी है कि पाकिस्तान ऐसी स्थिति में पहुँच चुका है जहाँ आतंकवाद का उपयोग सरकारी नीति का हिस्सा बन गया है."

अफ़ग़ानिस्तान के बारे में

इस स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तान के क़दमों पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, "जहाँ तक अफ़ग़ानिस्तान का सवाल है तो मैं नहीं समझता कि अमरीका और पाकिस्तान का लक्ष्य एक ही है. पाकिस्तान चाहेगा कि वह उसके नियंत्रण में हो और इसके लिए वह चाहेगा कि अमरीका अफ़ग़ानिस्तान से जितनी जल्दी हो सके, निकल जाए. लेकिन अमरीका चाहता है कि पाकिस्तान अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान से निपटे."

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई में पाकिस्तान पूरे दिल से सहयोग कर रहा है. वह तालेबान के ख़िलाफ़ कार्रवाई ज़रूर कर रहा हैं लेकिन तब, जब वह सेना की ताक़त को चुनौती देने लगते हैं."

अफ़ग़ानिस्तान की स्थित के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि अमरीका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफ़ग़ानिस्तान के मामले में दिलचस्पी लेता रहेगा.

प्रधानमंत्री सिंह ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान की जीत के परिणाम दुनिया के लिए गंभीर होंगे, ख़ासकर दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और मध्य पूर्व के लिए."

उनका कहना था कि जिन लोगों ने सोवियत संघ को परास्त किया वही लोग अगर दुनिया की एक दूसरी बड़ी शक्ति को भी हरा देते हैं तो इसके परिणाम दुनिया के लिए गंभीर होंगे.

जब उनसे पूछा गया कि अगर अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका निकल जाए तो क्या वहाँ गृहयुद्ध की स्थिति बन जाएगी, तो उन्होंने कहा, "इसका ख़तरा तो है."

परमाणु हथियार विकल्प नहीं

यह पूछे जाने पर कि किया भारत ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकेगा, उन्होंने कहा, "ईरान परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का हिस्सा है और इसका सदस्य होने के नाते शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा के उपयोग की सारी सुविधा उसे उपलब्ध होनी चाहिए."

उनका कहना है कि ईरान की यह बाध्यता है कि वह एनपीटी सदस्य की तरह नियमों का पालन करे.

मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं नहीं मानता कि परमाणु हथियार कोई विकल्प है."

अगले महीने कोपेनहेगन में होने वाले पर्यावरण सम्मेलन के बारे में उन्होंने कहा कि यह विकसित देश की ज़िम्मेदारी है कि वह कार्बन गैसों के उत्सर्जन में कमी करे.

उन्होंने उम्मीद जताई कि कोपेनहेगन में इस दिशा में ठोस पहल होगी.

हालाँकि उन्होंने कहा कि वे नहीं समझते कि जब तक अमरीका पहल नहीं करेगा, कोपेनहेगन में कोई समझौता संभव हो सकता है.

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