मुंबई में टीवी चैनल के दफ़्तर पर हमला

आईबीएन लोकमत का लोगो
Image caption दफ़्तर में भी तोड़फोड़ की गई है

मुंबई में एक निजी टेलीविज़न चैनल के दफ़्तर में घुसकर कुछ उपद्रवियों ने मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट की है.

वहीं पुणे में उसी चैनल की ओबीवैन को भी नुक़सान पहुँचाया गया है.

चैनेल का कहना है कि शिवसेना ने इस घटना की ज़िम्मेदारी क़बूल कर ली है.

उपद्रवियों ने मुंबई के विक्रोली स्थित टीवी चैनल के दफ़्तर में तोड़फोड़ भी की.

मुंबई पुलिस के प्रमुख डी शिवानंदन ने घटना पर अफ़सोस जताते हुए जानकारी दी कि इस सिलसिले में सात लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

निंदा

ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईएस) ने इस घटना की निंदा की है और कहा, "यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है, ये वो तत्व हैं जो क़लम, माइक और कैमरे की भूमिका को कमज़ोर करना चाहते हैं."

बीईएस के अध्यक्ष शाज़ी ज़माँ का कहना है कि ये हमला लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है और इसकी हर मुमकिन निंदा की जानी चाहिए.

एसोसिएशन ने हमले की जाँच की भी माँग की है.

दूसरी ओर मीडिया जगत के कई बड़े संपादकों ने भी घटना की निंदा की है.

राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने भी हमले पर अफ़सोस जताया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि लोकतंत्र में क़ानून को हाथ में लेने की इज़ाज़त नहीं दी जा सकती है.

उनका कहना था, "मैं वादा करता हूँ कि जो भी इस घटना में शामिल होंगे उन्हें क़ानून के मुताबिक़ सज़ा दी जाएगी."

'कायराना' हमला

अशोक चव्हाण के अनुसार ये एक 'कायराना' हमला है. जिसकी योजना पहले ही बनाई ली गई थी.

हिंदी में शपथ लेने वाले राज्य के विधायक अबू आसिम आज़मी ने भी घटना की निंदा की है.

राज्य के गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कहा कि इस घटना के पीछे जो भी ताक़तें होंगी उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा.

उनका कहना था, "हमलावरों को सबक़ सिखाया जाएगा. ये हमला महाराष्ट्र की अस्मिता पर हमला है."

ग़ौरतलब है कि मंबई में 18 महीने पहले भी एक वरिष्ठ पत्रकार के घर पर हमला किया गया था.