'अमरीका से रिश्तों को और आगे बढ़ाएंगे'

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने यात्रा से पहले पाकिस्तान की स्थिति पर चिंता जताई है

वॉशिंगटन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वागत की भव्य तैयारियाँ हैं जहाँ ओबामा प्रशासन अपने पहले राजकीय अतिथि की मेज़बानी करेगा.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि यह दर्शाता है कि राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत-अमरीका संबंधों को कितनी तरजीह देते हैं.

अमरीका के राजनीतिक मामलों के उपमंत्री विलियम जे बर्न्स ने कहा, "इक्कीसवीं सदी में मानवीय दिशा तय करने में कुछ ही रिश्ते होंगे जो भारत-अमरीका के रिश्तों से बढ़कर होंगे."

संभावना है कि मनमोहन सिंह की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रुप दिया जाएगा.

अमरीका रवाना होने से पहले मनमोहन सिंह ने कहा, "अगर हमें 21 वीं सदी की वैश्विक चुनौतियों से निपटना है तो भारत और अमरीका के बीच गहन साझीदारी ज़रूरी है."

उन्होंने अपने बयान में कहा, 'पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के संबंधों में काफी बदलाव आया है.'

प्रधानमंत्री ने कहा कि अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है जिसे और आगे बढ़ाया जाएगा. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ वह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, डब्ल्यूटीओ की दोहा दौर की बातचीत और परमाणु निरशस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर बात करेंगे.

अहम मुलाक़ातें

मनमोहन सिंह शनिवार को चार दिनों की अमरीका यात्रा के लिए रवाना हो गए हैं.

हालांकि उनके लिए आयोजित राजकीय भोज 24 नवंबर को है, 22 नवंबर को अमरीका पहुँचने के बाद मनमोहन सिंह कुछ वरिष्ठ अमरीकी अधिकारियों, प्रभावशाली व्यावसायिक समुदाय से और 'थिक टैंक्स' से मुलाक़ात करेंगे.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि भारत और अमरीका के रिश्ते अब ऐसे दौर में पहुँच गए हैं कि हम वर्ष 2000 के बिल क्लिंटन के दौर में नहीं लौट सकते.

बिल क्लिंटन 22 वर्ष के लंबे अंतराल के बाद भारत आने वाले पहले अमरीकी राष्ट्रपति थे. इससे पहले सिर्फ़ तीन ही अमरीकी राष्ट्रपतियों ने भारत का दौरा किया था.

शीत युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु समझौता था जिसने भारत और अमरीका के बीच विश्वास की बुनियाद रखी है.

अमरीका में भारत की राजदूत मीरा शंकर ने कहा है कि मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा से न केवल भारत के रिश्ते मज़बूत होंगे बल्कि इससे दोनों देशों के संबंधों को आगे ले जाने में भी सहायता मिलेगी.

समझौते

Image caption इटली में जी-8 देशों की बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाक़ात हुई थी

अमरीकी और भारतीय अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है जिसमें व्यापार, कृषि, विज्ञान, स्वास्थ्य, सैन्य सहयोग और आतंकवादविरोधी समझौता शामिल है.

उनका कहना है कि इस दौरान कई सहमति पत्र (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग या एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की भी संभावना है.

कई भारतीय और अमरीकी कंपनियों ने 23 नवंबर की सुबह समारोह आयोजित किए हैं जिसमें एमओयू पर हस्ताक्षर होने हैं. इन कंपनियों में माइक्रोसॉफ़्ट, इंफ़ोसिस, टाटा कम्यूनिकेशन्स और टाइको इलेक्ट्रॉनिक्स आदि हैं.

जैसा कि विलियम बर्न्स ने कहा, मनमोहन सिंह की यात्रा के दौरान कोशिश की जा रही है कि निजी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के संगठन 'सीईओ फ़ोरम' को पुनर्जिवित किया जाए.

रक्षा सौदे

जिस समय अमरीका, भारत के साथ आर्थिक और सैन्य रणनीतिक समझौतों की बात कर रहा है, उसकी नज़र 18 अरब डॉलर के रक्षा सौदों पर भी है.

दक्षिण एशिया के लिए अमरीका के सहयक विदेश मंत्री रॉबर्ट ब्लेक का कहना है, "इस समय 18 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण रक्षा सौदों की संभावना दिख रही है जिसके लिए दो अमरीकी रक्षा कंपनियों में प्रतिस्पर्धा है. और इसमें सबसे अहम सौदा है बहुपयोगी लड़ाकू विमान का, जो दस अरब डॉलर का सौदा होगा."

उन्होंने कहा कि पिछली जुलाई में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की भारत यात्रा के दौरान जो 'एंड यूज़र' समझौता हुआ था उसने भारत को तकनीक देने का रास्ता साफ़ कर दिया है.

रॉबर्ट ब्लेक ने कहा कि अब भारत को चाहिए कि वह भारतीय रक्षा कंपनियों में विदेश निवेश की सीमा को 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 29 प्रतिशत कर दे.

पाकिस्तान का मुद्दा

जब भारत और अमरीका जैसे दो बड़े लोकतांत्रिक देश आपसी संबंधों को मज़ूबत करने की दिशा में काम कर रहे हों तो यह स्वाभाविक है कि दक्षिण एशिया में अमरीका के सबसे पुराने सहयोगी पाकिस्तान को अपनी स्थिति पर चिंता हो.

ख़ासकर तब जबकि भारत को वॉशिंगटन में आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से ज़्यादा महत्व मिल रहा हो.

हालांकि रॉबर्ट ब्लेक पाकिस्तान की इस चिंता को ख़ारिज करते हुए कहते हैं, "पाकिस्तान को चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि दोनों ही देश अमरीका के मित्र हैं."

हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि भारत और अमरीका के बीच जो कुछ हो रहा है उस पर पाकिस्तान की बेचैनी भरी नज़र लगी रहेगी.

इस बीच कश्मीरी अमरीकन काउंसिल ने उस दिन व्हाइट हाउस के सामने एक रैली करने की घोषणा की है जिस दिन मनमोहन सिंह और बराक ओबामा संयुक्त रुप से पत्रकारवार्ता करेंगे.

वे बराक ओबामा को याद दिलाना चाहते हैं कि उन्होंने अपने चुनावी वादे में कहा था कि वे कश्मीर का विवाद सुलझाने की दिशा में काम करते रहेंगे.

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