बाबरी रिपोर्ट पर हंगामा, संसद ठप्प

Image caption बाबरी विध्वंस के बाद गठित इस आयोग की रिपोर्ट को आने में सत्रह साल लगे हैं.

लिबरहान आयोग की लीक हुई रिपोर्ट के बाद संसद की कार्यवाही स्थगित हो गई है और सवाल उठ रहे हैं कि रिपोर्ट किसने लीक की.

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने संसद में एलान किया कि रिपोर्ट की एक ही प्रति है और वो उनके पास सुरक्षित है.

जब एम एस लिबरहान से पत्रकारों ने पूछा कि कहीं उन्होंने तो लीक नहीं की है रिपोर्ट इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को तो वो भड़क उठे.

उनका कहना था, ``मैं उस तरह का चरित्रहीन व्यक्ति नहीं हूं कि रिपोर्ट लीक कर दूं. मैंने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है.’’

ये पूरा हंगामा तब शुरू हुआ जब दिल्ली के अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि उनके पास रिपोर्ट के कुछ अंश हैं.

अख़बार के अनुसार इस रिपोर्ट में लिबरहान आयोग ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के लिए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सबको दोषी ठहराया है.

बीबीसी इन आरोपों की पुष्टि नहीं कर रही और ये ख़बर मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है.

अख़बार के अनुसार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बाबरी मस्जिद को गिराने की सुनियोजित तैयारी की गई थी और इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इन नेताओं को इसका पता नहीं था या फिर वो इस पूरे घटनाक्रम में निर्दोष हों.

इस रिपोर्ट को तैयार होने में सत्रह साल का वक्त लगा है और 48 बार आयोग की कार्य अवधि को बढ़ाया गया है.

लिब्रहान आयोग ने ये रिपोर्ट प्रधानमंत्री को जून में सौंपी थी.

गृहमंत्री पी चिदंबरम ने इस रिपोर्ट को इसी शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश करने का एलान किया है.

अख़बार के अनुसार लिबरहान आयोग की रिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को इस सारे विवाद से परे बताते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है.

सोमवार को लोकसभा में यह मामला ज़ोरशोर से उठा और भाजपा ने रिपोर्ट के इस तरह लीक होने पर कड़ी आपत्ति जताई.

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी का कहना था, "लिबरहान आयोग ने अपनी रिपोर्ट जून में ही सरकार को सौंप दी थी फिर इसे संसद में पेश करने में इतनी देरी क्यों हुई है? मैं सरकार से संसद में इस रिपोर्ट को ज्यों का त्यों आज ही रखने की मांग करता हूँ".

उन्होंने कहा, "मैं लिबरहान आयोग को लिखित में पहले ही यह कह चुका हूँ कि विवादित ढाँचा का टूटना मेरे लिए दुखद था. लेकिन अयोध्या आंदोलन से जुड़ना मेरे लिए गर्व की बात थी".

छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद जगह-जगह दंगे हुए और फिर इस मामले की जाँच के लिए न्यायमूर्ति लिबरहान की अध्यक्षता में इस आयोग का गठन किया गया.

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