हुर्रियत ने सभी समितियाँ भंग कीं

मीरवाइज़ उमर फ़ारूख
Image caption मीरवाइज़ सभी अलगाववादी नेताओं के बीच आम सहमति बनाना चाहते हैं

भारत प्रशासित कश्मीर की ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नरमपंथी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने संगठन के पुनर्गठन के लिए सभी समितियों को भंग कर दिया है.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का ये गुट तब से संकटग्रस्त था जब से मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने भारत सरकार के साथ परदे के पीछे शुरू की गई बातचीत में भाग लेने की इच्छा जताई थी.

वो ऐसी त्रिपक्षीय वार्ता के पैरोकार है जिसमे वो भारत और पकिस्तान से अलग अलग बातचीत कर सकें और दोनों देश भी आपस में अलग से बातचीत करते रहे.

उनके इस प्रस्ताव का हुर्रियत के अन्य नेताओं ने विरोध किया था.

एक अन्य नेता शब्बीर शाह भारत पकिस्तान से एक साथ बातचीत के हामी हैं. हुर्रियत के एक और नेता नईम ख़ान ने तो भारत के साथ किसी भी तरह की बातचीत का विरोध किया है.

पुनर्गठन

इन दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी अलग राय व्यक्त की थी. सोमवार को मीरवाइज़ के घर पर बैठक में हुर्रियत के नेताओं ने संगठन के पुनर्गठन के लिए सहमति दे दी.

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े एक महत्वपूर्ण नेता ने बीबीसी को बताया,'' हम किसी तरह का बड़ा नीतिगत निर्णय लेने से पहले अपने घर को दुरुस्त कर लेना चाहते हैं.''

पुनर्गठन की प्रक्रिया 28 नवंबर के बाद प्रारंभ होने की संभावना है.

मीरवाइज़ का कहना है कि वो भारत सरकार से बातचीत शुरू करने के पहले सभी अलगाववादी नेताओं के बीच आम सहमति बनाना चाहते हैं.

हालात को देखते हुए आम सहमति कठिन लगती है क्योंकि कट्टरपंथी अलगाववादी नेता जैसे सैयद अली शाह गिलानी इस बात पर जोर देते हैं कि भारत सरकार कश्मीरियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत में पाकिस्तान को शामिल करे.

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