'पाकिस्तान में किससे बात करूं?'

Image caption मनमोहन सिंह ने कहा है कि ओबामा प्रशासन के दौरान भी रिश्तों की गर्माहट बनी रहेगी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वो समझ नहीं पा रहे कि पाकिस्तान में बात किससे की जाए क्योंकि लोकतंत्र के बावजूद ताक़त सेना के ही हाथों में है.

चार दिनों के वाशिंगटन दौरे पर गए मनमोहन सिंह ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि वो चाहेंगे कि पाकिस्तान में लोकतंत्र फले फूले और कामयाब हो.

उनका कहना था, ``लेकिन हमें ये भी समझना होगा कि सत्ता सही मायने में सेना के हाथो में है.’’

ये पूछे जाने पर कि क्या कोई ऐसा है पाकिस्तान में जिसके साथ वो किसी तरह की बातचीत शुरू कर सकें, प्रधानमंत्री ने कहा, ``मुझे नहीं लगता कि वहां कोई है.’’

प्रधानमंत्री का कहना था कि जब जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति थे तो वो कहते थे ‘’मैं ही सेना हूं. मैं ही फ़ौज का प्रतिनिधत्व करता हूं, मैं ही जनता का प्रतिनिधित्व करता हूं.’’

प्रधानमंत्री का कहना था: ``अब मुझे पता नहीं मैं किससे बात करूं.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के हालात से वो चिंतित हैं, और इस बात की भी चिंता रहती है कि कहीं उनके परमाणु हथियार चरमपंथियों के हाथों में न पड़ जाएं.

लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा: ``अमरीकियों ने हमें आश्वासन दिया है कि उन्हें भरोसा है कि ऐसा नहीं होगा.’’

कश्मीर के बारे में प्रधानमंत्री का कहना था सीमाओं में फिर से कोई फेरबदल नहीं की जाएगी लेकिन दोनों ही देश (भारत और पाकिस्तान) ये सुनिश्चित करें कि इन सीमाओं पर शांति रहे, लोगों के बीच बेहतर मेलजोल हो जिससे सीमाओं का कोई मतलब नहीं रह जाए.

सोमवार को प्रधानमंत्री के साथ आए उद्दोगपतियों का दल अमरीकी उद्दोगपतियों से मिल रहा है.

मंगलवार को प्रधानमंत्री की मुलाक़ात राष्ट्रपति ओबामा से होनी है.

उन्होंने कहा है उन्हें पूरा यकीन है कि ओबामा प्रशासन के दौरान भारत और अमरीका के रिश्तों में किसी तरह की ठंडक नहीं आएगी.

प्रधानमंत्री ने ये बयान एक सवाल के जवाब में दिया जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या ओबामा प्रशासन के साथ रिश्ते वैसे हो पाएंगे जैसे बुश प्रशासन के दौरान थे.

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