ज़िंदगी में डर ने घर कर लिया...

प्रशांत थांबे

थांबे लियोपोल्ड कैफ़े में चरमपंथियों की गोलीबारी में घायल हो गए थे


लियोपोल्ड कैफ़े में हुई गोलीबारी के दौरान लाशों के ढेर में छुपकर जान बचाने वाले प्रशांत थांबे को अब भी डर लगता है.

थांबे मुंबई की झोपड़पट्टी में रहते हैं. उनका कहना है कि इस घटना को अब साल भर बीत चुका है लेकिन उनकी ज़िंदगी में डर ने घर कर लिया है.

थांबे कहते है, ‘‘उस घटना के दो-तीन महीने तक तो मुझे बुरे-बुरे सपने आते थे. लगता था पता नहीं कब क्या हो जाएगा लेकिन परिवार को देखना पड़ता है. घर से निकलना पड़ता है. क्या करेंगे. डर के घर में बैठने से तो नहीं चलेगा.’’

उस दिन को याद करते हुए थांबे कहते हैं, ‘‘मैं टेबल सर्व कर रहा था तो अचानक गोलियों की आवाज़ें आने लगी. मुझे लगा कोई पटाखे चला रहा है. तब तक एक गोली मुझे लगी. मैं गिर गया. उसके बाद मेरी आंखों के सामने कई लोग गोली खाकर गिरे. मैं उन्हीं लाशों में पड़ा रहा.’’

सिहरन

थांबे आज भी वो दिन याद कर सिहर उठते हैं और कहते हैं, ‘‘गोलियां चलाने वाले मेरे पास से गुज़रे थे. मुझे उनके जूतों की आवाज़ आज भी याद है. मैंने उनके जूते देखे थे. वो अंग्रेज़ी में कह रहे थे किल ऑल. किल ऑल.’’

गोलियां चलाने वाले मेरे पास से गुज़रे थे. मुझे उनके जूतों की आवाज़ आज भी याद है. मैंने उनके जूते देखे थे. वो अंग्रेज़ी में कह रहे थे किल ऑल. किल ऑल

प्रशांत थांबे

थांबे बहुत अधिक पैसा कमा नहीं पाते हैं और न ही उन्हें सरकार से कोई मदद मिली है. वो कहते हैं कि उन्हें पता ही नहीं था कि 26 नवंबर में घायलों को सरकार मदद कर रही है.

यह पूछे जाने पर कि क्या इस घटना के बाद मुसलमानों के प्रति उनका नज़रिया बदला है, वो कहते हैं, ‘‘मेरे दो सबसे अच्छे दोस्त मुस्लिम थे जो इस घटना में मारे गए. मुझे तो मुस्लिमों से और हमदर्दी हो गई है. मेरे दोस्तों के परिवारों को अब कौन देखेगा.’’

पाकिस्तान के साथ भी वो बेहतर रिश्तों के पक्ष में हैं और कहते हैं कि दोनों देशों को मिलकर चरमपंथ का मुक़ाबला करना चाहिए.

हाँ, नेताओं से उन्हें ज़रूर नाराज़गी है. उनका कहना है कि सुरक्षा के नाम पर आम आदमी अब भी असुरक्षित ही है.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.