सुखोई में उड़ान भरी प्रतिभा पाटिल ने

  • 25 नवंबर 2009
प्रतिभा पाटिल
Image caption प्रतिभा पाटिल ने महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों के ऊपर उड़ान भरी

हमेशा परंपरागत भारतीय परिधान साड़ी में दिखाई देने वाली राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल गुरुवार को वायुसेना के पायलटों के लिए निर्धारित जी-सूट में दिखाई पड़ीं तो उन्हें पहचानना आसान नहीं था.

लेकिन धीमी-धीमी चाल से चलकर जब वे सुखोई की सीढ़ियाँ चढ़ने लगीं तो यह जानना कठिन नहीं था कि लड़ाकू विमानों के परिवेश में वे एक अजनबी हैं.

वायुसेना के अधिकारी जिस तरह उनके आसपास थे और जिस तरह से उन्हें समझाइश दे रहे थे, उससे ज़ाहिर था कि वे अपने सुप्रीम कमांडर की उड़ान के लिए अतिरिक्त सचेत हैं.

सुबह 11 बजे पुणे के लोहगाँव एयरफ़ोर्स बेस से उड़ान भरी तो मौसम ठंडा था लेकिन सूरज आसमान पर चमक रहा था.

पायलट के पीछे वाली सीट पर बैठी प्रतिभा पाटिल आश्वस्त दिखाई दे रहीं थीं और हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन कर रही थीं.

लगभग 25 मिनट की उड़ान के दौरान सुखोई-30 एमकेआई ने लगभग दस हज़ार फुट की ऊँचाई पर उड़ान भरी और ध्वनि की रफ़्तार से कुछ कम यानी

कोई 800 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से उड़ान भरी.

विश्वास से भरपूर

उड़ान के बाद प्रफुल्लित नज़र आ रही 74 वर्षीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने पत्रकारों से अपने अनुभव भी बाँटे.

उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पायलटों की प्रतिभा और क्षमता पर उन्हें गर्व है और हर भारतीय को गर्व होना चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने लड़ाकू विमान में उड़ान भरने का फ़ैसला क्यों किया, तो उन्होंने कहा, "हम जानना चाहते थे कि नई टेक्नॉलॉजी से युक्त विमान को पायलट इतनी कुशलता से किस तरह उड़ाते हैं."

सेना की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा, "उनमें जो विश्वास है वह हमें विश्वास दिलाता है कि हमारा देश सुरक्षित है. हम रक्षा सेवाओं को दिखाना चाहते थे कि पूरा देश उनके साथ है."

और क्या उनके परिवार वालों के मन में किसी तरह का कोई आशंका थी, तो उन्होंने कहा, "आशंका तो किसी को नहीं थी, हाँ, एक तरह की उत्सुकता ज़रुर थी. मुझे पहले भी विश्वास था और अभी भी है."

लेकिन लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर लौटने के बाद भी राष्ट्रपति इस सवाल पर कोई आश्वासन नहीं दे सकीं कि देश में महिलाओं को लड़ाकू विमान उड़ाने का मौक़ा मिलना चाहिए.

पहले उन्होंने कहा कि यह विशेषज्ञों का काम है और जब सवाल दोहराया गया तो उन्होंने कहा, "पहले सेना में महिलाएँ नहीं थीं. अब हैं. अब वे हैलिकॉप्टर उड़ा रही हैं, हमारी सेना और सरकार महिलाओं को लेकर काफ़ी प्रो-एक्टिव रही हैं और वे आने वाले समय में सही फ़ैसला लेगीं."

इस उड़ान से पहले प्रतिभा पाटिल का मेडिकल टेस्ट हुआ और उन्होंने हल्का नाश्ता भी किया.

लेकिन इसकी तैयारी वे दो महीनों से कर रही थीं. कई तरह के परीक्षणों के बाद उन्हें इस उड़ान के लिए फ़िट घोषित किया गया था.

उनसे पहले राष्ट्रपति रहे एपीजे अब्दुल कलाम ने लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर इतिहास रचा था.

लेकिन प्रतिभा पाटिल ने इस इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है.

वे राष्ट्रपति बनने वाली देश की पहली महिला तो थी हीं, अब वे लड़ाकू विमान में उड़ान भरने वाली पहली महिला, पहली महिला राष्ट्रपति और सबसे उम्रदराज़ महिला भी बन गई हैं.

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