कंधमाल हिंसा मामले में 12 दोषी

  • 28 नवंबर 2009
उड़ीसा
Image caption कंधमाल ज़िले में जमकर हिंसा हुई थी

उड़ीसा के कंधमाल ज़िले की एक अदालत ने पिछले साल शहर में हुई ईसाई विरोधी हिंसा के मामले में 12 लोगों को दोषी ठहराया है.

इन लोगों पर आगजनी और ग़ैर क़ानूनी रूप से एकत्र होने का आरोप था. दो अन्य अभियुक्तों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है.

सरकारी वकील पीके पत्रा ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के जज सीआर दास ने सभी 12 दोषियों को आगजनी के मामले में चार-चार साल की और ग़ैर क़ानूनी रूप के एकत्र होने के मामले में एक-एक साल क़ैद की सज़ा सुनाई है.

इन दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 436 (आगजनी) और 148 (ग़ैर क़ानूनी रूप से एकत्र होना) के तहत सज़ा सुनाई गई है. हालाँकि ये दोनों सज़ाएँ साथ-साथ चलेंगी.

आरोप

इसके अलावा जज ने सभी 12 दोषियों को आगजनी के मामले में दो-दो हज़ार और ग़ैर क़ानूनी रूप से एकत्र होने के मामले में पाँच-पाँच सौ रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

इन लोगों पर आरोप था कि 25 अगस्त 2008 को उन्होंने सिरपीगुडा गाँव के दुबाराज डिगल का घर और चावल मिल में आग लगा दी और संपत्ति लूट ली.

हिंदू धार्मिक नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वति की हत्या के बाद कंधमाल ज़िले में बड़े पैमाने पर ईसाई विरोधी हिंसा हुई थी.

हिंसा में कम से कम 40 लोग मारे गए थे और 25 हज़ार लोग बेघर हो गए थे.

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