झारखंड में हिंसा, प्रचार भी प्रभावित

एक माओवादी कार्यकर्ता (फ़ाइल)
Image caption माओवादी चाहते हैं कि उनके नेता महतो को अदालत या मीडिया के सामने लाया जाए

भारत के झारखंड राज्य में माओवादियों के बुलाए 48 घंटे के बंद के दूसरे दिन सोमवार को भी कई जगह पर हिंसक घटनाएँ हुई हैं. रविवार को भी अनेक जगहों पर माओवादियों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था जिससे विधानसभा चुनाव प्रचार पर भी असर पड़ा है.

झारखंड में इस बंद के दौरान नौ स्कूल इमारतों को निशाना बनाया गया है, गिरडीह में एक रेल स्टेशन पर हमला हुआ है और रेल पटरी को भी नुकसान पहुँचाया गया है.

चत्रा ज़िले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के वाहन को निशाना बनाकर बारूदी सुरंग का विस्फोट हुआ है जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. राष्ट्रीय जनता दल की प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिका यादव का घर बारूद लगाकर उड़ा दिया गया है. खूँटी-तमाड़ के जंगलों में एक पुल को उड़ा दिया गया है.

प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) ने ये बंद अपने शीर्ष नेता अशोक महतो की कथित गिरफ़्तारी के विरोध में बुलाया गया है.

सीपीआई (माओवादी) की झारखंड क्षेत्रीय कमेटी के सचिव समर जी ने बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया था कि अशोक महतो को पुलिस ने अन्गादा थाना इलाक़े से 23 अक्तूबर को गिरफ़्तार किया था. उनका ये भी कहना है कि गिरफ़्तारी के कई दिन बाद तक भी महतो को न तो अदालत, न मीडिया के सामना पेश किया गया है. दूसरी ओर पुलिस नें इस तरह की किसी भी गिरफ़्तारी से इनकार किया है.

झारखंड में विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण की 14 सीटों के लिए दो दिसंबर को मतदान होना है और सोमवार को प्रचार का अंतिम दिन है. लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रचार निर्धारित समय से दो दिन पहले ही ख़त्म हो गया है.

'बंद की अवधि बढाएँगे'

उधर माओवादियों के प्रवक्ता समरजी ने बीबीसी संवाददाता अतुल संगर के साथ बातचीत में धमकी दी कि यदि उनके सहयोगी को सार्वजनिक तौर पर पेश नहीं किया जाता तो वे बंद की अवधि बना सकते हैं.

उनका कहना था, "ये जितनी वारदातें हैं इन्हें हमने अंजाम दिया है क्योंकि पुलिस ने 36 दिन के बाद भी हमारे सहयोगी को पेश नहीं किया है. यदि वे पेश नहीं करते तो दिसंबर में 10 से 16 तारीख़ तक बंद होगा और यदि तब भी हमारे सहयोगी को सार्वजनिक तौर पर पेश नहीं किया जाता तो पूरे झारखंड में अनिश्चितकालीन बंद का आहवान किया जाएगा."

चुनाव प्रक्रिया बाधित करने के सवाल पर समरजी का कहना था कि माओवादियों ने पहले ही चुनाव का बहिष्कार किया हुआ है. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि माओवादियों की वजह से चुनाव प्रचार में बाधा पड़ी है.

समरजी का कहना था, "हमारे हथियारों के डर से नहीं जनता ख़ुद ही चुनाव का बहिष्कार कर रही है. ये झूठ है कि बंदूक के साए के कारण लोग चुनावों में भाग नहीं लेते. लाखों लोगों को बंदूक की धमकी से बांधकर नहीं रखा जा सकता."

प्रचार बुरी तरह प्रभावित

विशेष तौर पर खूंटी, तमाड़, गुमला, पलामू, गढ़वा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम के ग्रामीण इलाकों में बंद का ज़ोरदार असर देखा जा रहा है.

ज़्यादातर सड़कों पर सन्नाटा है. राजमार्गों पर ट्रक और लंबी दूरी की बसें नहीं चल रही हैं और निजी वाहन भी सड़कों से गायब हैं.

चुनाव प्रचार पर यह असर हुआ है कि प्रत्याशी अपने-अपने चुनावी क्षेत्रों में नहीं जा पा रहे हैं. सड़कों पर, रिहायशी इलाक़ों में पार्टियों के झंडे या फिर प्रचार संबंधित अन्य गतिविधियाँ नज़र नहीं आ रही हैं.

पिछले चरण में ग्रामीण इलाक़ों में माओवादियों का प्रभाव स्पष्ट नज़र आया था और शहरों में तो मात्र 32 प्रतिशत मतदान हुआ था.

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार बंद के कारण कोयले और लोह अयस्क की धुलाई बाधित है और राजमार्गों पर अर्धसैनिक बलों के जवान गश्त कर रहे हैं.

शनिवार को देर रात माओवादियों नें बोकारो के निकट दनिया और जोगेश्वर विहार रेलवे स्टेशनों के बीच धमाका किया था और पटरी को क्षतिग्रस्त कर दिया था. इससे हावड़ा-दिल्ली रेल खंड पर ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई थी.

इसके अलावा पलामू जिले के हरिहरगंज धन्मानी उच्च विद्यालय को विस्फोट से उड़ाया गया पूर्वी सिंहभूम में बीच सड़क पर बारूदी सुरंग के विस्फोट में तीन लोगों की मौत हो गई.

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