अब मान भी जाओ मनमोहन..

Image caption मनमोहन सिंह पर कोपेनहेगन जाने का दबाव काफ़ी बढ़ गया है.

पर्यावरण मामलों से जुड़ी संस्था ग्रीनपीस ने कोपेनहेगन के लिए सैंकड़ों भारतीय नागरिकों के हस्ताक्षर वाला एक विमान टिकट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपा है जिससे वो जलवायु बैठक में शामिल होने के लिए मन बनाएं.

कम से कम 65 राष्ट्राध्यक्ष इस बैठक में शामिल होने जा रहे हैं.

इनमें अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ, ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा, जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने भी अपनी उपस्थिति की सहमति दे दी है.

इन नेताओं के वहां पहुंचने से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर भी दबाव काफ़ी बढ़ गया है कोपेनहेगन जाने का लेकिन उन्होंने फ़िलहाल अपना मन नहीं बनाया है या कम से कम इसका एलान नहीं किया गया है.

इस बैठक में भारत की अहम भूमिका होगी और वैसे तो पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के नेतृत्व में भारतीय दल वहां मौजूद रहेगा लेकिन मनमोहन सिंह के वहां होने से विकासशील देशों का पक्ष और मज़बूत होगा.

इस अनूठे हस्ताक्षर अभियान के ज़रिए पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री पर दबाव बनाने की कोशिश की है.

पिछले एक हफ़्ते से मनमोहन सिंह का मुखौटा लगाए कार्यकर्ताओं ने लोगों के बीच जाकर उनसे पूछा है कि क्या प्रधानमंत्री को कोपेनहेगन जाना चाहिए.

संगठन की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया है कि सैंकड़ों लोगों ने इसके समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं.

भगत सिंह कॉलेज में पढ़ रहे एक ग्रीनपीस कार्यकर्ता शारिब हुसैन का कहना था: ``मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोपेनहेगन में एक बाध्यकारी समझौते के लिए निजी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. ये मेरी और आनेवाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है.’’

ये विमान टिकट साधारण दर्जे का है और उड़ान दिल्ली से हेलसिंकी की है और फिर हेलसिंकी से कोपेनहेगन तक.

मंगलवार को ही अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी प्रधानमंत्री से फ़ोन पर बातचीत की और उसमें जलवायु परिवर्तन पर हो रही बैठक पर भी चर्चा हुई है.

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