'पा' के नायक से मुलाक़ात का इंतज़ार

इकरामूल, रेहाना और अली
Image caption अमिताभ पा फ़िल्म में प्रोजेरिया से पीड़ित बच्चे की भूमिका निभा रहे हैं

कोलकाता में रहने वाले असली 'पा' को 'पा' फ़िल्म के नायक अमिताभ बच्चन से मुलाक़ात का इंतज़ार है.

अपनी आने वाली फ़िल्म 'पा' में प्रोजेरिया से पीड़ित एक बच्चे की भूमिका निभाने वाले अमिताभ बच्चन ने इस बीमारी से पीड़ित 24 वर्षीय इकरामूल और 11 वर्षीय हुसेन को मिलने का न्यौता भेजा है.

बिहार में छपरा के रहने वाले यह दोनों बच्चे बचपन से ही इस बीमारी से पीड़ित हैं. उम्र भले कम हो, इस बीमारी की वजह से वे बचपन से सीधे बुढ़ापे में पहुंच गए हैं.

सात वर्ष पहले महानगर की एक चैरिटी संस्था इन दोनों को कोलकाता ले आई. तब से वे यहीं रहते हैं. इकरामूल के परिवार में उनके सभी पांच भाई-बहन प्रोजेरिया से पीड़ित थे. लेकिन उनमें से अब यही दोनों भाई बचे हैं.

पहले लोग इस बीमारी से ज्यादा परिचित नहीं थे, लेकिन चार दिसंबर को रिलीज़ होने जा रही फ़िल्म 'पा' ने लोगों में इस बीमारी को जानने की लालसा को बढ़ा दी है.

इस फ़िल्म का प्रचार होने के बाद अब यह दोनों भाई अचानक सुर्ख़ियों में आ गए हैं. इकरामूल कहते हैं, "मैं रिलीज़ होते ही यह फ़िल्म देखना चाहता हूं. लोग कह रहे हैं कि फ़िल्म में अमिताभ बच्चन हमारी तरह ही दिखते हैं. वे भी हमसे मिलना चाहते हैं."

Image caption शेखर चटर्जी कहते हैं कि इन्हें कई बीमारियाँ घेरे हुए हैं और ये धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे हैं

फ़िल्म से माध्यम से जागरूकता

वे कहते हैं, "यह सब मेरी क़िस्मत है. लोग अचानक मुझे हीरो कह रहे हैं." वे 24 वर्ष की उम्र में ही 80 वर्ष के बूढ़े की तरह दिखते हैं.

ये दोनों जिस चैरिटी होम में रहते हैं उसके संचालकों को मुंबई से फ़ोन आया था कि अमिताभ इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से एक फ़िल्म बनाना चाहते हैं.

कुछ दिनों पहले ख़ुद अमिताभ ने इकरामूल को एसएमएस भेज कर उसका हौसला बढ़ाया और मुलाक़ात की इच्छा जताई. अब दोनों भाई अपने माता-पिता के साथ मुंबई जाने की योजना बना रहे हैं.

महानगर में एसबी देवी चैरिटी होम के महासचिव शेखर चटर्जी कहते हैं, "अपने सात में से पांच बच्चे को इस बीमारी से पीड़ित देख कर ख़ान परिवार तो आत्महत्या करने का प्रयास कर रहा था. तीन की तो मौत हो गई. अब बाकी दोनों भी धीर-धीरे मौत की ओर बढ़ रहे हैं."

हर बीतते साल के साथ इन दोनों की उम्र सामान्य से कहीं ज़्यादा बढ़ जाती है. शेखर बताते हैं कि आसपास के लोग इन बच्चों को एलियंस के नाम से पुकारते थे.

वे कहते हैं कि हम लगातार इनका हौसला बढ़ाते रहते हैं. यही वजह है कि मानसिक और शारीरिक रूप से अविकसित होने के बावजूद इकरामूल अपना नाम लिख-पढ़ लेते हैं. पहले यह दोनों ठीक से बोल नहीं पाते थे. लेकिन अब साफ़ बोलते हैं और गाना भी गाते हैं.

शेखर बताते हैं कि बच्चों को होनेवाली छोटी-मोटी बीमारियों के अलावा बुज़ुर्गों को होनेवाली बीमारियां भी इनको घेर लेती हैं. खाने के अलावा इनको सोने और उठने-बैठने में भी परेशानी होती है. झुक नहीं पाने की वजह से ये बिस्तर पर सीधे गिरते हैं और उठते भी सीधे ही हैं. सोते वक़्त भी इनकी आंखें खुली रहती हैं.

अब जीवन के अंतिम दौर में प्रवेश कर चुके इन दोनों भाइयों को 'पा' के नायक से मुलाक़ात का बेसब्री से इंतज़ार है.

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