कई और गुमनाम कब्रें

  • 3 दिसंबर 2009
रिपोर्ट जारी करते संस्था के लोग
Image caption कश्मीर में पिछले 20 वर्षों में बड़ी संख्या में लोग लापता भी हुए हैं.

एक मानवाधिकार संगठन का कहना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में कई और गुमनाम क़ब्रों का पता चला है.

भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार और न्याय मामलों से जुडे़ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन इंटरनेशनल पीपुल्स ट्राइब्यूनल ऑन ह्यूमैनराइट्स ऐंड जस्टिस ने 2700 क़ब्रों की सूची तैयार की है.

इनमें से कुछ सामूहिक क़ब्रों में तीन से पांच शव थे. अधिकतर शव गुमनाम लोगों के हैं.

'बरीड एविडेंस' यानि छिपे साक्ष्य नाम की इस रिपोर्ट के मुताबिक ये सामूहिक क़ब्रें बारामूला, कुपवाडा़ और बांदीपुरा घाटी में मिली हैं. संगठन ने पिछले साल भी उरी में एक हज़ार क़ब्रों का पता लगाया था.

संगठन ने उन पचास लोगों के मामलों की पड़ताल की जिन्हें सुरक्षा बलों ने विदेशी आतंकवादी बता कर मारा था. रिपोर्ट का कहना है कि इनमें से 47 आम लोग थे जो फर्जी़ मुठभेड़ों में मारे गए. संगठन की संयोजक डॉ. अंगना चटर्जी कहती हैं कि जिन 50 मामलों की उन्होंने पड़ताल की उनमें से 47 आम नागरिक थे न कि विदेशी आतंकवादी.

डॉ. चटर्जी का ये भी कहना है कि हो सकता है कि इन क़ब्रों में उन 8,000 लोगों के शव हों जो पिछले 20 सालों के दौरान सेना के साथ संघर्ष में लापता हो गए.

संगठन की मांग है कि पुलिस को उन लोगों की तस्वीरें जारी करनी चाहिए जिन्हें दफ़नाया गया ताकि लोगों के परिजन ये जान पाएँ कि उन गुमशुदा लोगों की कतार में कहीं उनके अपने तो नहीं हैं और उनका अंतिम संस्कार किया भी गया कि नहीं.

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