शीला दीक्षित की पहल

  • 4 दिसंबर 2009
सौर ऊर्जा
Image caption सौर ऊर्जा से प्रदूषण बिल्कुल भी नहीं होता है.

गुरूवार को संसद में जलवायु परिवर्तन पर चार घंटो से ज्यादा चली गरमा गरम बहस का जवाब देते हुए केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि भारत अपनी स्वेच्छा से 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में 20 से 25 प्रतिशत की कटौती करेगा लेकिन वो कोपेनहेगेन सम्मेलन में किसी भी हालत मे क़ानूनी बाध्यता को स्वीकार नहीं करेंगे.

यानी भारत का रूख़ साफ है कि जलवायु परिवर्तन के लिए वो सीधे तौर पर ज़िम्मेदार नहीं है लेकिन इसके दुष्प्रभाव को रोकने के लिए वो खुद से हर संभव प्रयास करता रहेगा.

इसी दिशा में स्वच्छ ऊर्जा पाने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दिक्षित ने अपने घर पर सोलर पावर प्लांट लगाने का फ़ैसला किया है.

25 किलोवाट का ये प्लांट ग्रीड से जुड़ा होगा. दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली कंपनी एनडीपीएल ये प्लांट लगा रही है.

शीला ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने राज्य की हर सरकारी इमारत पर सोलर हीटर लगाने का निर्णय लिया है, साथ ही जलवायु के बदलाव से होने वाले ख़तरे से लोगो को आगाह करने के लिए सरकार काफी बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चला रही है.

कुछ ही दिनों पहले अक्षय ऊर्जा मंत्री फ़ारूक़ अबदुल्ला ने राष्ट्रीय बायोमास चुल्हा अभियान की शुरूआत की . जैविक ईंधन से चलने वाले चुल्हों से हो रहे प्रदुषण को रोकने के लिए ये क़दम उठाया गया है.

वैकल्पिक ऊर्जा

समारोह में मौजुद जलवायु परिवर्त्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दुत शयाम सरन ने कहा कि इस अभियान से पर्यावरण को भी फ़ायदा पहुंचेगा और इससे ना सिर्फ भारत को बल्कि दुनिया के 50 करोड़ परिवारों को भी लाभ होगा.

जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को समझते हुए भारत ने पिछले महींने जवाहरलाल राष्ट्रीय सौर ऊर्जा अभियान को कैबिनेट की मंज़ूरी दी. लगभग 19 अरब डॉलर की ये परियोजना तीन चरणों मे पूरी की जाएगी जिसके तहत 2020 तक सौर ऊर्जा से बीस हज़ार मेगावाट बिजली पैदा की जाएगी.

सौर ऊर्जा के जानकार कुशाल यादव के मुताबिक़ ये विश्व की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना है और इसके ज़रिए भारत ये दिखाना चाहता है कि वो दूसरे देशो की अपेक्षा बहुत ज़्यादा कर रहा है जबकि उसे उतना करने की कोई बाध्यता भी नही है.

कोपेनहेगेन सम्मेलन से पहले उठाए जा रहे इन क़दमों से भारत दुनिया को ये बताना चाहता है कि जहां तक नैतिक ज़िम्मेदारी का सवाल है भारत इसमें किसी से पीछे नही है.

संबंधित समाचार