कड़ी सुरक्षा घेरे में अयोध्या

  • 9 सितंबर 2010
बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की 17 वीं बरसी को देखते हुए अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है.

हर साल छह दिसंबर को राजनीतिक दल और अन्य संगठन इस मौके पर जुलूस निकालते थे और अन्य कार्यक्रम आयोजित करते थे लेकिन इस साल प्रशासन ने इस तरह की गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है.

एहतियाती तौर पर उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों में पुलिस को सतर्क रहने को कहा गया है.

17 साल पहले बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक हिंसा फैल गई थी और सैंकड़ों लोग मारे गए थे.

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की जाँच के लिए गठित लिबरहान आयोग की रिपोर्ट इसी साल आई है जिसमें उस घटना के लिए विभिन्न हिंदू संगठनों, भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं समेत कई अन्य कारणों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है.

इस रिपोर्ट के विरोध को देखते हुए भी इस बार विशेष एहतियात बरती जा रही है.

अयोध्या में जगह-जगह चेकपोस्ट बनाए गए हैं और हर गाड़ी की तलाशी ली जा रही है. ज़िले में पाँच हज़ार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है.

इस बीच चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की घटना पर कोई अफ़सोस नहीं है.

उन्होंने कहा, "हम सभी चाहते हैं कि वहां राम मंदिर बने. संघ मंदिर मुद्दे से जुड़ा रहेगा."

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

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