शांति से बीती विध्वंस की बरसी

Image caption कुछ संगठनों ने राम मंदिर बनाने की भी मांग की

बाबरी विध्वंस की 17वीं बरसी शांतिपूर्ण तरीक़े से बीत गई. उत्तर प्रदेश और ख़ासतौर पर अयोध्या में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.

बाबरी विध्वंस की बरसी पर कहीं विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए तो कहीं इसे जश्न के रूप में भी मनाया गया.

राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद पुनर्निर्माण समिति के सदस्यों ने धरना दिया.

उन्होंने मांग की कि अयोध्या में उसी स्थान पर बाबरी मस्जिद का फिर से निर्माण किया जाना चाहिए.

समिति के सदस्यों ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को एक मांग पत्र भी सौंपा, जिसमें लिबरहान आयोग की रिपोर्ट में ज़िम्मेदार ठहराए गए लोगों को जेल भेजने की मांग भी की गई.

सुरक्षा व्यवस्था

दूसरी ओर दिल्ली के ही एक इलाक़े में अपने को राष्ट्रवादी सेना कहने वाले एक संगठन ने छह दिसंबर का दिन विजय दिवस के रूप में मनाया.

Image caption बाबरी मस्जिद के फिर से निर्माण के लिए भी लोग सड़क पर उतरे

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई संवेदनशील इलाक़ों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी.

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेश (क़ानून व्यवस्था) एके जैन ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि राज्य के किसी इलाक़े से किसी तरह की घटना की कोई ख़बर नहीं है.

उन्होंने कहा, "दिन शांतिपूर्ण तरीक़े से गुज़र गया और किसी भी इलाक़े से किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं है."

अयोध्या में केंद्रीय सुरक्षा बलों के अलावा पीएसी की पाँच कंपनियाँ, रैपिड एक्शन फ़ोर्स की दो कंपनियाँ भी तैनात की गई थी. इनके अलावा बम निरोधक दस्ते के जवान भी वहाँ मौजूद थे.

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