राजधानी का फ़ैसला सर्वसम्मति से: गृह सचिव

तेलंगाना को लेकर भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई ने अपना बयान वापस ले लिया है.

जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा था,"इसमें कोई शक नहीं कि बातचीत से ही तेलंगाना मसले का हल निकाला जा सकता है. जहाँ तक हैदराबाद की बात है तो अगर तेलंगाना बनता है राजधानी हैदराबाद ही होगी."

इसके बाद हैदराबाद को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. लेकिन अब गृह सचिव ने कहा है कि तेलंगाना की राजधानी का फ़ैसला सर्वसम्मति से किया जाएगा.

केंद्र सरकार ने तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया शुरु करने की घोषणा तो कर दी है लेकिन हैदराबाद किसके पास जाएगा इसे लेकर अभी से टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.

इस बीच भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ग़ैर तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेसी सांसदों को आश्वासन दिया है कि अलग राज्य के गठन के सिलसिले में कोई भी क़दम जल्दबाज़ी में नहीं उठाया जाएगा.

ये जानकारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केएस राव ने दी. तटीय आँध्रप्रदेश और रायलसीमा के सांसदों ने चालीस मिनट तक मनमोहन सिंह से मुलाक़ात की. इसके बाद केएस राव ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें तेलंगाना के मुद्दे पर आश्वासन दिया है.

बैठक में सांसदों ने प्रधानमंत्री को प्रदेश की स्थिति और विधायकों के इस्तीफ़े के बारे में बताया.

गृह मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर राव ने कहा, गृह मंत्री ने सिर्फ़ ये कहा था कि तेलंगाना के गठन की प्रक्रिया की शुरुआत के लिए राज्य विधानसभा से एक प्रस्ताव लाने को कहा जाएगा. इसमें कोई नई बात नहीं है..

उन्होंने कहा कि इस मसले पर फ़रवरी में ही एक समिति गठित की गई थी जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री कर रहे थे.

केएस राव ने कहना था कि स्थिति बेहद गंभीर है और राजनेताओं के लिए बहुत मुश्किल है कि वो अपने मतदाताओं के पास वापस जाएँ क्योंकि लोग एकीकृत आँध्रप्रदेश चाहते हैं.

मतभेद

वहीं तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. अलग राज्य की माँग को लेकर वे 11 दिन तक अंशन पर थे.

तेलंगाना के मुद्दे पर आँध्रप्रदेश में विभिन्न पार्टियों के विधायकों के इस्तीफ़े का सिलसिला लगातार जारी है. इस मुद्दे पर इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों की संख्या 128 हो गई है.

पूरा प्रदेश इस मुद्दे पर विभाजित नज़र आ रहा है.आंध्र प्रदेश विधानसभा के स्पीकर किरण कुमार रेड्डी ने कहा है कि वे इस्तीफ़ा भेजने वाले विधायकों से अलग-अलग भेंट करेंगे और इसके बाद फैसला होगा कि क्या किया जाएगा.

गुरुवार रात राज्य कैबिनेट की बैठक हुई थी और स्थिति पर विचार किया. इस बैठक में मुख्यमंत्री के रोसैया ने ये समझाने की कोशिश की कि अभी तो प्रस्ताव भी नहीं आया है.

उन्होंने कहा कि इतने हंगामे की आवश्यकता नहीं है क्योंकि बहुमत से ही यह प्रस्ताव पास होगा.

आंध्र प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 155, टीडीपी के 93 और प्रजाराज्यम के 17 विधायक हैं.

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