संसद पर हमले में मृतकों को श्रद्धांजलि

संसद पर मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि
Image caption आठ साल पहले भारतीय संसद पर पाँच सशस्त्र हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी की थी

भारतीय संसद पर आठ साल पहले हुए हमले की बरसी पर रविवार को संसद परिसर में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई.

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कई सांसदों ने इस चरमपंथी हमले में मारे गए लोगों को याद किया और श्रद्धांजलि अर्पित की.

लोकसभा की स्पीकर मीरा कुमार और लोक सभा में विपक्ष मे नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी.

ग़ौरतलब है कि 13 दिसंबर 2001 को पाँच सशस्त्र हमलावरों ने भारतीय संसद पर हमला कर अंधाधुंध फ़ायरिंग की थी. इस हमले में नौ लोग मारे गए थे.

मारे गए लोगों में पाँच दिल्ली पुलिस के सुरक्षाकर्मी, एक केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल की महिला सुरक्षाकर्मी, राज्य सभा सचिवालय के दो कर्मचारी और एक माली शामिल थे.

संसद पर हमला

जिस समय संसद पर हमला हुआ था तब वहाँ लगभग 300 सांसद और नेता मौजूद थे. इससे पहले कि चरमपंथी संसद भवन के भीतर पहुँच पाते वहाँ सुरक्षाबलों के साथ संघर्ष में वे मारे गए.

राज्य सभा और लोक सभा अभी स्थगित हैं, फिर भी इस मौके पर कई सांसद मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए उपस्थित थे.

भारतीय संसद पर हमले के मामले में चार चरमपंथियों को गिरफ़्तार किया गया था.

बाद में दिल्ली की पोटा अदालत ने 16 दिसंबर 2002 को चार लोगों, मोहम्मद अफज़ल, शौकत हुसैन, अफ़सान और प्रोफ़ेसर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी को दोषी करार दिया था.

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफ़ेसर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी और नवजोत संधू उर्फ़ अफ़साँ गुरु को बरी कर दिया था, लेकिन मोहम्मद अफ़ज़ल की मौत की सज़ा बरकरार रखी थी और शौकत हुसैन की मौत की सज़ा को घटाकर 10 साल की सज़ा कर दिया था.

अफज़ल गुरु की क्षमा याचिका इस समय राष्ट्रपति के पास विचाराधीन है.

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