'शोपियाँ में मौत नाले में डूबने से हुई'

  • 14 दिसंबर 2009
शोपियाँ मुद्दे पर प्रदर्शन (फ़ाईल)
Image caption दोनों महिलाओं के परिवारवालों ने इस पर असंतोष जताया है

भारत प्रशासित कश्मीर में दो महिलाओं, निलोफ़र और आसिया जान की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत की जाँच कर रही केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के निष्कर्ष के मुताबिक उनकी मौत एक नाले में डूबने की वजह से हुई है.

जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की खंडपीठ के सामने पेश अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा है कि दोनों महिलाओं के साथ न तो बलात्कार किया गया और न ही उनकी हत्या की गई.

सीबीआई ने 13 लोगों के ख़िलाफ़ झूठा मामला बनाने का भी आरोप लगाया. इनमें छह डॉक्टर्स, पाँच वकील और दो नागरिक शामिल हैं.

सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों ने झूठी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दी और डीएनए जाँच के लिए ग़लत स्लाइड्स भेजे.

सीबीआई ने पुलिस अधीक्षक जावेद इक़बाल सहित चार पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया. इन अधिकारियों को सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.

सीबीआई का कहना है कि अधिकारियों के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को सिद्ध नहीं किया जा पाया.

असंतोष

सीबीआई के इस कथन पर दोनो महिलाओं के परिवारवालों और शोपियाँ मामले पर आंदोलन कर रहे संगठन मजलिसे मशावरात ने असंतोष जताया है.

संगठन ने उच्च न्यायालय को बताया कि सीबीआई ने जानबूझकर घटना के ज़िम्मेदार लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाया है.

संगठन की ओर से मोहम्मद शफ़ी ख़ान और अब्दुल रशीद दलाल ने कहा कि सीबीआई ने दोनों महिलाओं के रिश्तेदारों की दी गईं महत्वपूर्ण जानकारियों को रिकॉर्ड ही नहीं किया.

यहाँ पर बता दें कि राज्य सरकार ने इससे पहले इस मामले की एक आयोग से जांच करवाने के आदेश दिए थे. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इस केस में पुलिस की किसी एजेंसी के शामिल होने की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता.

जाँच आयोग ने एसपी जावेद इकबाल और अन्य तीन पुलिसकर्मियों के बारे में कहा था कि उन्होंने केस के सबूत मिटाए.

घटना

नीलोफ़र और आसिया के शव 30 मई को शोपियाँ के रनबियारा नाले में मिले थे.

Image caption राज्य सरकार पर आरोप लगे हैं कि वो मामले को दबाने की कोशिश कर रही है

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस या सुरक्षाबलों ने दोनो महिलाओं के साथ बलात्कार किया और फिर उनकी हत्या कर दी. लोगों की नाराज़गी इस कदर बढ़ी कि लोगों ने ज़बरदस्त प्रदर्शन किए और 47 दिनों तक शोपियाँ बंद रहा.

इस घटना से पूरी कश्मीर घाटी में आक्रोश इतना बढ़ा कि घाटी में आठ दिनों तक बंद रखा गया जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर झड़प हुईं और हिंसा में दो प्रदर्शनकारी मारे गए.

मामले पर राज्य विधानसभा में भी गर्मागर्मी हुई और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस्तीफ़ा देना पड़ा, हालांकि राज्यपाल ने उनका इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं किया.

राज्य सरकार पर आरोप लगे कि वो मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और अंत में सरकार ने मामले को सीबीआई को सौंप दिया.

अब सीबीआई इस मामले में उच्च न्यायालय के सामने पावर प्रेज़ेंटेशन देगी. सीबीआई न्यायालय को जानकारी देना चाहती है कि उसने इस मामले पर क्या कार्रवाई की है.

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