मौत से हारा मौत देने वाला

नाटा मलिक
Image caption नाटा मिलक 89 वर्ष के थे और काफ़ी दिनों से बीमार चल रहे थे.

भारत के चर्चित जल्लाद नाटा मलिक का लंबी बीमारी के बाद कोलकता में निधन हो गया है. वे 89 वर्ष के थे.

कोलकाता के टॉलीगंज के रहने वाले मलिक का सोमवार की सुबह निधन हुआ. वे पिछले अनके दशकों से कोलकाता के अलीपुर जेल में जल्लाद की सेवा प्रदान कर रहे थे. उन्होंने अपने जीवन में 25 से भी अधिक लोगों को फांसी दी.

नाटा मलिक के पिता भी एक जल्लाद थे और वे अंग्रेजों शासन के दौरान मौत की सज़ा पाने वाले लोगों को फांसी देने का काम करते थे. नाटा के पिता शिवलाल मलिक ने कई स्वतंत्रता सेनानियों को भी फांसी पर चढ़ाया था.

सुर्ख़ियों में रहे

मलिक 2004 में उस वक़्त सुर्ख़ियों में आए थे जब उन्होंने धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया था. धनंजय को सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता की 15 वर्षीय स्कूली छात्रा हितल पारेख के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराया था.

धनंजय को जब फांसी की सज़ा सुनाई गई थी, उस समय राज्य में कोई भी जल्लाद नहीं था, क्योंकि मलिक इससे कुछ महीने पूर्व ही सेवानिवृत्त हो गए थे.

धनंजय को फाँसी देने के लिए राज्य सरकार ने नाटा से संपर्क साधा, लेकिन मलिक ने दोबारा जल्लाद बनने के बदले अपने बेटे को सरकारी नौकरी देने की शर्त रखी. सरकार ने मलिक की शर्त मानी और फिर वह धनंजय को फांसी पर लटकाने के लिए तैयार हुए.

मलिक न केवल असली जीवन में जल्लाद रहे बल्कि उन्होंने 1970 के दशक में मृणाल सेन की फिल्म 'मृगया' में भी जल्लाद की भूमिका निभाई थी. उनको लोगों ने टेलीविजन कार्यक्रमों और रंगमंच में भी देखा है.

जोसी जॉसेफ़ ने अपने चलचित्र- डे फ़्राम ए हैंग्समैन लाइफ़ यानी एक जल्लाद की ज़िंदगी का एक दिन में मलिक की विडंबना को दिखाया है.

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