आर्थिक सुधार की दिशा में बढ़े क़दम

संयंत्र
Image caption यूपीए सरकार के पिछले कार्यकाल में विनिवेश की प्रक्रिया रुकी हुई थी

नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (एनटीपीसी) में सरकारी शेयरों के एक हिस्से को जनता के बीच बेचने से जो रास्ता तैयार हुआ वो आगे बढ़ता नज़र आ रहा है.

विनिवेश इस प्रक्रिया पर यूपीए सरकार के पिछले कार्यकाल में ब्रेक लग गया था क्योंकि तब सरकार वाम दलों के समर्थन पर आश्रित थी.

लेकिन दूसरे कार्यकाल में इस तरह का कोई दबाव सरकार पर नहीं है.

एनटीपीसी के बाद केंद्र सरकार ने तय किया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के जो उपक्रम लाभ अर्जित कर रहे हैं उनके दस प्रतिशत हिस्से का विनिवेश कर दिया जाए.

इसके लिए लाभ अर्जित करने वाली सभी कंपनियों को शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध करवाया जाएगा.

विनिवेश से सरकार को 30 से 40 हज़ार करोड़ रूपए की आमदनी होगी जिसे राष्ट्रीय निवेश कोष में रखा जाएगा.

हालांकि इसका इस्तेमाल सामाजिक कार्यक्रमों पर हो सकता है.

केंद्र सरकार से उम्मीद थी कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की सीमा को बीमा और बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ाया जाएगा लेकिन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने बजट में और उसके बाद इससे साफ़ इनकार करते हुए कहा कि अभी इसकी कोई आवश्यकता नहीं है.

हालांकि ट्राई ने एफ़एम रेडिये में विदेशी निवेश की सीमा 20 फ़ीसदी से बढ़ा कर 40 फ़ीसदी करने की सिफ़ारिश की है.

इसी तरह पेंशन क्षेत्र में सुधार के लिए वर्षों से लंबित पेंशन कोष नियामक और विकास प्राधिकरण के गठन से संबंधित प्रस्ताव पर फिर से विचार हो रहा है. दिसंबर में ही कैबिनेट की बैठक में इस पर चर्चा हुई है.

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