मंत्रियों के वेतन बढ़े,सत्र समाप्त

  • 18 दिसंबर 2009

अगर केंद्र सरकार के मंत्रियों के लिए कोई अच्छी ख़बर संसद के इस सत्र से निकली है तो वो बस सत्र के आखिरी दिन.

लोकसभा के तमाम हल्ले गुल्ले के बीच सत्र के अंतिम दिन मंत्रियों के तनख्वाहें बढ़ाने वाला बिल अन्य चार बिलों के साथ फुर्ती से 55 मिनट में पास हो गया.

मंत्री के वेतन भत्तों के अलावा रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे के लिए विज़न 2020 रखा. साथ ही हाई कोर्ट के कमर्शियल डिविज़ऩ का बिल भी पारित हो गया.

वैसे अगर पलट कर देखें तो 19 नवंबर से चल रहे सत्र में कई छोटे बड़े मसले दिखे जिन पर सरकार असहज हो गई.

चार मुद्दे बाकी मसलों से अलग उठ कर दिखते हैं-महंगाई, लिबरहान आयोग की रिपोर्ट, कोपेनहेगन सम्मेलन, डेविड हेडली और तेलंगाना जिसके कारण शुरू हुआ पृथक राज्यों का मसला.

तेलंगाना पर मचा बवाल

आख़िर इन चार में से सबसे ज़्यादा किस बात ने यूपीऐ सरकार को परेशान किया? राजनीतिक मसलों पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर तपाक से जबाव देते हैं कि तेलंगाना के मसले ने.

वे कहते हैं,"महंगाई का मसला कोई मसला नहीं बचा है. ये उठता रहा है और रहेगा, हेडली के मसले पर सरकार को शर्मिंदा होना था पर वो शर्मिंदा दिख नहीं रही. कोपेनहेगन के मसले पर कुछ खास हुआ नहीं लेकिन तेलंगाना का मसला ऐसा है जिस पर कांग्रेस में साफ़ दरार नज़र आई. सांसदों को आलाकमान ने कहा था की तेलंगाना का मसला मत उछालो पर कुछ नहीं हुआ जगनमोहन ने पूरी राजनीति खेली और पार्टी कुछ कर नहीं पाई."

संसद में जहाँ एक ओर बिल पास हो रहे थे तेलगु दसम पार्टी के सांसद तेलंगाना पर गृह मंत्री की घोषणा को वापस लेने की मांग के लिए नारे लगा रहे थे.

कहा जाता है अंत भला सो सब भला पर यूपीऐ सरकार का कोई मंत्री अपना वेतन बढ़ने के बावजूद ये नहीं कह सकता कि संसद के इस सत्र का अंत भला था.

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