गुजरात में अनिवार्य होगा मतदान

नरेंद्र मोदी
Image caption नरेंद्र मोदी का तर्क है कि इससे लोकतंत्र मज़बूत होगा

देश में पहली बार गुजरात सरकार ने एक विधेयक पारित किया है जिसके अनुसार स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनावों में मतदान करना अनिवार्य होगा.

कांग्रेस ने राज्य विधानसभा में इस विधेयक का विरोध किया.

गुजरात स्थानीय अधिकार क़ानून (संशोधन) विधेयक-2009 के क़ानूनी दर्जा मिलने के बाद किसी मतदाता का बिना किसी ठोस कारण के वोट नहीं डालना आसान नहीं होगा, बल्कि उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई हो सकती है.

इस विधेयक में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का भी प्रावधान है.

विधेयक को शनिवार की सुबह राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा में पेश किया था.

हालाँकि राज्य कांग्रेस ने मतदान को अनिवार्य बनाने के प्रावधान का यह कह कर विरोध किया कि यह संवैधानिक प्रावधानों के विरोधाभासी है, हालांकि कांग्रेस ने महिलाओं के आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का समर्थन किया.

नरेंद्र मोदी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए अनिवार्य मतदान का का़नून ज़रूरी है.

लोकतंत्र की ख़ातिर

उनका कहना था, "हम उस समय तक लोकतांत्रित प्रक्रियाओं को मज़बूत नहीं कर सकते, जब तक मतदान देना अनिवार्य नहीं बनाया जाता."

उनका कहना था कि संविधान ने प्रत्येक भारतीय को वोट देने का अधिकार दिया है.

यदि यह विधेयक क़ानून बन जाता है तो गुजरात के हर मतदाता को स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनावों में वोट डालना अनिवार्य होगा और अगर कोई वोटर ग़ैरहाज़िर रहा तो स्थानीय चुनाव अधिकारी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है.

इसके तहत वोटर को वोट नहीं डालने का वैध कारण एक महीने के अंदर-अंदर बताना होगा और अगर वो वैध कारण बताने में असफल रहे तो उनपर कार्रवाई हो सकती है.

क़ानून में उन मतदाताओं को छूट दी गई है जो मदतान के दिन बीमार होंगे और देश या राज्य से बाहर होंगे.

हालाँकि राजनीतिक गलियारों में नरेंद्र मोदी के इस क़दम की यह कह कर आलोचना की जा रही है कि इसके ज़रिए वो अपनी छवि एक सुधारवादी नेता के तौर पर पेश करना चाहते हैं.

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