तो भी नहीं रुक पाता हमला...

Image caption चरमपंथियों ने मुंबई के ताज होटल को निशाना बनाया था

मुंबई हमलों पर गठित आरडी प्रधान समिति की रिपोर्ट का कहना है कि पुलिस आयुक्त हसन गफ़ूर ने समिति को बताया है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा में लगे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानी एसपीजी तक को मुंबई में आतंकवादी हमले की आशंका नहीं थी.

मुंबई पुलिस के साथ प्रधानमंत्री की सुरक्षा टीम ने 26 नवंबर को मुंबई में एक बैठक भी की, जिसमें एसपीजी और आईबी के प्रतिनिधियों ने आतंकवादी हमला होने की किसी गुप्तचर सूचना का ज़िक्र तक नहीं किया. उसी दिन शाम को मुंबई में हुए हमलों ने देश को हिलाकर रख दिया.

29 नवंबर को प्रधानमंत्री को ट्राइडेंड होटल में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेना था. 26 नवंबर को ताज होटल के साथ इस होटल पर भी चरमपंथी हमला हुआ था.

पूछताछ

करीब 70 पेज की अपनी रिपोर्ट में आरडी प्रधान और वी बालाचंद्रन ने मुंबई पुलिस के आला अधिकारियों के साथ-साथ 50 अन्य लोगों से मुंबई की सुरक्षा, इंटेलीजेंस और 26 नवंबर की घटनाओं के बारे में पूछताछ की.

समिति ने पुलिस महानिदेशक एएन रॉय, पुलिस कमिश्नर हसन गफ़ूर, संयुक्त पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया से विस्तार से पूछताछ की.

Image caption सुरक्षा एजेंसियों ने आने वाले समय में मुंबई पर हवाई हमले की आशंका जताई है

रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों को इस बात की चेतावनी दी गई है कि विश्व में आतंकवादी गुटों की गतिविधियों, आतंकवादी घटनाओं और उनसे जुड़े पहलुओं को उन्हें लगातार समझाना और उनसे सीख लेनी होगी.

रिपोर्ट का कहना है कि अगर काबुल के सेरेना होटल में हुए चरमपंथी हमले और इस्लामाबाद के मैरिएट होटल में हुए आत्मघाती हमलों से अगर सुरक्षा एजेंसियों ने सीख ली होती तो उन्हें मुंबई में जैसा हमला हुआ उसकी आशंका होती और उससे निपटने के लिए एजेंसियों ने क़दम उठाए होते.

सुरक्षा एजेंसियों को चेताया गया है कि आने वाले समय में मुंबई पर हवाई हमला हो सकता है, जिसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए. रिपोर्ट का कहना है कि मुंबई में कई सरकारी और निजी हेलीकॉप्टर हैं, जिनका अपहरण कर आतंकवादी गुट शहर में दहशत पैदा कर सकते हैं.

इंटेलिजेंस के मुद्दे पर प्रधान समिति ने रिपोर्ट पर विस्तार से चर्चा की है. समिति का कहना है कि अगस्त 2006 और फ़रवरी 2007 के बीच केंद्रीय एजेंसियों ने मुंबई पुलिस को ये जानकारी भेजी थी कि शहर पर समुद्र के रास्ते हमला हो सकता है, लेकिन 26 नवंबर 2008 के हमले पर कोई इंटेलिजेंस अलर्ट नहीं भेजा.

साथ ही प्रधान समिति ने इस मुद्दे पर एक अहम टिप्पणी की है कि अगर पहले से मुंबई पुलिस को जानकारी दी भी जाती तो उसके संसाधन, तैयारी और प्रशिक्षण को देखते हुए कहा जा सकता है कि मुंबई पुलिस उस हमले को रोकने में सक्षम नहीं हो पाती.

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