महाभियोग का कारण दलित होना है?

जस्टिस दिनाकरन
Image caption राज्यसभा में जस्टिस दिनाकरन के ख़िलाफ़ जाँच का प्रस्ताव मंज़ूर कर लिया गया है

कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति पीडी दिनाकरन के ख़िलाफ़ महाभियोग का मामला अब जातीय रंग पकड़ता जा रहा है.

इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है.

ग़ौरतलब है कि जब राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को न्यायमूर्ति पीडी दिनाकरन के ख़िलाफ़ महाभियोग के प्रस्ताव की प्रक्रिया चल रही थी, तो दलित सांसदों का एक गुट इसे रोकने की रणनीति तैयार कर रहा था.

विपक्षी राजनीतिक दलों के 75 सांसदों ने गुरूवार को न्यायमूर्ति दिनाकरन के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव हामिद अंसारी को सौंपा, जबकि उसके दूसरे दिन कांग्रेस सांसद प्रवीण राष्ट्रपाल ने इस मामले को राज्यसभा में उठाया और कहा कि महाभियोग का प्रस्ताव 'जाति भेद' पर आधारित है. यानी यह प्रस्ताव इसलिए लाया गया है क्योंकि न्यायमूर्ति दिनाकरन दलित हैं.

निंदा

अनुसूचित जाति सांसद फ़ोरम के बैनर तले सांसदों ने इस महाभियोग प्रस्ताव की निंदा भी की.

फ़ोरम के सदस्य और कांग्रेस सांसद जीडी सेलम कहते हैं, "अगर जस्टिस दिनाकरन के ख़िलाफ़ आरोप था तो उसकी जांच पहले क्यों नहीं करवाई गई, अब क्यों कराई जा रही है जब वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश बन सकते हैं."

उनका कहना था, "मुझे लगता है कुछ लोग इस मामले को इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि वह एक दलित को सुप्रीम कोर्ट जज बनने से रोकना चाहते हैं."

कांग्रेस के एक और सांसद और इस फ़ोरम के सदस्य सवाल उठाते हैं कि आख़िर जब पहले भी हाई कोर्ट और यहाँ तक की सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पर ऐसे आरोप लगे तो उन्हें हटाने की प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू की गई.

फ़ोरम के अध्यक्ष राधाकांत नायक ने बीबीसी से कहा कि दलित सांसदों का फ़ोरम सोमवार को हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को महाभियोग के ख़िलाफ़ एक प्रस्ताव भेजेगा.

कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के ख़िलाफ ज़मीन हड़पने, आय से अधिक संपत्ति रखने, बेनामी संपत्ति की मिलकियत और आधिकारिक जांच के दौरान सबूत मिटाने जैसे आरोप हैं.

माया की माँग

Image caption मायावती ने इस सिलसिले में प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है

इस बीच उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मनमोहन सिंह को एक चिट्ठी लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है.

हालाँकि उन्होनें अपने ख़त में दलित शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है लेकिन समझा जाता है कि उन्होंने इस मामले को इसलिए उठाया है क्योंकि पी डी दिनाकरन दलित हैं.

भाजपा के प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने मायावती की चिट्ठी को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

कांग्रेस नेता शकील अहमद कहते है कि चूँकि यह मामला फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट की एक समिति के सामने है तो पार्टी इसपर कोई राय नहीं देगी.

ग़ौरतलब है कि जो महाभियोग संसद में लाया गया है उसमें कांग्रेस शामिल नहीं और उसके कुछ सांसद इसका विरोध भी कर रहे हैं.

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