'पुलिस में नेतृत्व की कमी थी'

  • 20 दिसंबर 2009
ताज होटल
Image caption मुंबई हमले में 170 के क़रीब लोग मारे गए थे

मुंबई हमलों पर गठित आरडी प्रधान समिति का कहना है कि मुंबई हमले के दौरान पुलिस बल में नेतृत्व की कमी थी.

प्रधान समिति को मुंबई हमलों में हुए सुरक्षा ख़ामियों की जाँच के लिए दिसंबर 2008 में गठित किया गया था.

वर्तमान और सेवानिवृत्त पुलिस अफ़सरों और पुलिस कर्मियों से पूछताछ करने के बाद प्रधान समिति ने पाया है कि महाराष्ट्र के 720 किलोमीटर लंबे समुद्री तट और मुंबई के तटवर्तीय इलाक़े में सरकार सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है.

अगस्त, 2006 और अप्रैल, 2008 के बीच छह सुरक्षा चेतावनी राज्य प्रशासन को दिए थे, लेकिन सरकार ने तटवर्ती सुरक्षा बेहतर और मज़बूत करने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया.

राज्य प्रशासन ने इस मामले में भारतीय तटरक्षक के साथ लगातार संपर्क और तालमेल नहीं बिठाया, जबकि 2003 में भारत सरकार ने समुद्री तट और तटवर्ती इलाक़ों की सुरक्षा के लिए एक मुख्य गुप्तचर एजेंसी बनाया था.

तालमेल की कमी

पुणे और मानेसर में कुछ महीने उन्हें प्रशिक्षण भी दिया गया, लेकिन चरमपंथी हमला होने पर या चरमपंथी गुट के ज़रिए किसी के बंदी बनाए जाने की स्थिति से निपटने के लिए कमांडो को ट्रेनिंग नहीं दी गई.

एक जगह रिपोर्ट यह कहती है कि दिल्ली से एनएसजी कमांडो के मुंबई पहुँचने से पहले जब मुंबई पुलिस का एक दस्ता ताज होटल पर पहुँचा, लेकिन उसके पास एक ही वायरलेस सेट था जिससे पुलिस कर्मी एक दूसरे से बातचीत नहीं कर पाए.

रिपोर्ट का कहना है कि पुलिस बल में नेतृत्व की कमी थी. मुंबई पुलिस आयुक्त हसन ग़फ़ूर पर अपनी टिप्पणी में रिपोर्ट कहती है कि उन्हें कंट्रोल रुम में बैठकर ऑपरेशन का जायज़ा लेना चाहिए था, लेकिन वो ट्राइडेंट होटल के पास रहे.

Image caption प्रधान कमेटी की रिपोर्ट का कहना है कि पुलिस के बीच तालमेल की कमी थी

महाराष्ट्र पुलिस निदेशक एएन राय ने समिति को बताया कि 1993 में यह तय हुआ था कि तटरक्षक बल के साथ महाराष्ट्र पुलिस समुद्री तट की सुरक्षा करेंगे लेकिन वो लागू नहीं हो सका.

अलग-अलग विभाग केवल बैठक करते रहे और सुरक्षा मज़बूत करने के लिए कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया.

समिति का मानना है कि मुंबई हमलों के बाद भी समुद्री तट और तटवर्ती सुरक्षा का मामला पूरी तरह से लागू नहीं किया जा रहा है और इसमें कई अड़चने आ रही हैं.

गोली की कमी

शहर की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मियों की कमी, समय पर प्रशिक्षण न होना और सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक हथियारों और गोली की कमी का ज़िक्र किया गया है.

चौंकाने वाली कुछ ऐसी बातें हैं जैसे कि एक कमांडो दस्ता गठित किया गया, लेकिन उसके प्रशिक्षण में बड़ी कमियां थीं.

रिपोर्ट के अनुसार मुश्किल स्थिति में सभी उच्च अधिकारियों को मिलकर काम करना चाहिए, लेकिन सुरक्षा के तय नियमों को भी गंभीरता से नहीं लिया गया और जिसका मन किया वैसे उसने हमले से पैदा स्थिति का सामना किया.

कुलमिलाकर प्रधान समिति का कहना है कि राजनीतिक स्तर पर सुरक्षा के मामलों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को तटवर्ती सुरक्षा कार्यक्रम आदि को लागू करना चाहिए, क्योंकि आम आदमी का धैर्य टूट रहा है.

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