झारखंड में बैठकों और जोड़-तोड़ का दौर

सोरेन
Image caption कांग्रेस और भाजपा दोनों की नज़र शिबू सोरने पर टिकी हुई है.

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कहा है कि वो राज्य में भारतीय जनता पार्टी और आजसू के समर्थन से सरकार बनाएगी. हालांकि कांग्रेस भी झामुमो के संपर्क में है.

राज्य में त्रिशंकु विधानसभा बनने के बाद से ही सरकार गठन को लेकर रस्साकशी चल रही है थी. देर शाम झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमलाल मूर्मू ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी के साथ समर्थन के मु्द्दे पर सहमति बन गई है.

विधानसभा में झामुमो के 18 विधायक हैं जबकि बीजेपी गठबंधन के पास 20 विधायक हैं. इसके अलावा आजसू भी झामुमो को समर्थन देने को तैयार है. आजसू के पांच विधायक हैं.

उधर कांग्रेस ने अभी अपनी कोशिशें कम नहीं की हैं और पार्टी नेता कह रहे हैं कि सरकार गठन के मामले में वो शिबू सोरेन से लगातार संपर्क में हैं.

शनिवार को भारतीय जनता पार्टी और जेडी यू के विधायक दल की बैठक होगी जिसमें यह तय किया जाएगा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को किन शर्तों पर समर्थन दिया जाए.

इससे पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पार्टी नेता शिबू सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया है और साफ़ है कि बीजेपी के साथ सरकार बनी तो वही मुख्यमंत्री पद संभालेंगे.

ग़ौरतलब है कि शिबू सोरेन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे उस दल के साथ जाएँगे जो उन्हें बिना रोकटोक समर्थन देगा.

महत्वपूर्ण है कि चुनावों से प्राप्त हुए नतीजों में झारखंड विकास मोर्चे के समर्थन वाले कांग्रेस गठबंधन को 25 सीटें मिली हैं, जनता दल के समर्थन वाले भाजपा गठबंधन को 20 सीटें मिली हैं जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को 18 सीटें मिली हैं. राष्ट्रीय जनता दल को पाँच सीटें मिली हैं.

उधर ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के पाँच उम्मीदवार जीते हैं. मार्क्सवादी समन्वय समिति और आदिवासी छात्र संघ के एक-एक उम्मीदवार जीते हैं और बाक़ी निर्दलीय हैं.

शुक्रवार को सभी दलों और गठबंधनों की अलग-अलग बैठकें हो रही हैं जिनमें ये अपनी भावी रणनीति तय कर रहे हैं.

सोरेन की शर्त, मरांडी का पलटवार

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा एक बड़े और महत्वपूर्ण दल के रूप में सामने आया है और बिना उसके समर्थन के कोई भी पार्टी या गठबंधन सरकार नहीं बना पाएगा.

जहाँ जेएमएम के शिबू सोरेन नें मुख्यमंत्री पद की शर्त रखी है वहीं कांग्रेस के सहयोगी दल झारखंड विकास मोर्चा के नेता बाबूलाल मरांडी ने उन पर दबाब बनाने की कोशिश की है.

बाबूलाल मरांडी नें बयान दिया है की कांग्रेस और झारखण्ड विकास मोर्चा बिना झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के भी सरकार बनाने की स्थिति में हैं.

बाबूलाल का इशारा छोटे-छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की तरफ़ है जिनकी कुल संख्या 18 है.

उधर कांग्रेस बाबूलाल के इस विचार से सहमत नहीं नज़र आ रही है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस हाई कमान अभी सरकार बनाने की जल्दी में नहीं है और वह इंतज़ार करने को तैयार है.

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