तेलंगाना: मंत्रियों ने दिया इस्तीफ़ा

हैदराबाद में प्रदर्शन
Image caption प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में तोड़फोड़ की है

अलग तेलंगाना राज्य के लिए सांसदों और विधायकों के इस्तीफ़ों के बाद अब तेलंगाना क्षेत्र से चुनकर आए राज्य मंत्रिमंडल के 13 मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

इस्तीफ़ा देने वाले मंत्रियों में जे गीता रेड्डी, डी श्रीधर राव, पोन्नला लक्ष्मैय्या के नाम प्रमुख हैं. इन मंत्रियों ने सचिवालय में मुख्यमंत्री से मुलाक़ात की और सामूहिक इस्तीफ़ा सौंप दिया.

इनकी मांग है कि तेलंगाना के गठन के मुद्दे पर केंद्र सरकार स्पष्ट प्रतिबद्धता जाहिर करे. मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के रोसैया को इस्तीफ़ा सौंपा है और इस्तीफ़े की प्रति कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी भेज दी है.

तेलंगाना से चुन कर आए मंत्रियों की बैठक के बाद उच्च शिक्षा मंत्री श्रीधर बाबू ने कहा, '' हमारे लिए सत्ता और पद महत्वपूर्ण नहीं है. हमारे लिए तेलंगाना का महत्व है.''

राज्य विधानसभा की नेता और पूर्व में सूचना मंत्री रहीं गीता रेड्डी का कहना था कि केंद्रीय गृह मंत्री का ताज़ा बयान स्पष्ट नहीं है और ज़रुरत है कि एक समय सीमा देने की जिसमें तेलंगाना राज्य के गठन की बात स्पष्ट हो.

इस बीच वारंगल में कुछ लोगों ने सिंचाई मंत्री पी लक्ष्मैय्या के घर पर हमला किया और सामान नष्ट कर दिया. वो मांग कर रहे थे कि लक्ष्मैय्या तेलंगाना के मुद्दे पर तुरंत इस्तीफ़ा दें.

इसे देखते हुए सभी मंत्रियों के घरों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

शुक्रवार को बैठक

तेलंगाना के लिए आंदोलन की आगे की रुपरेखा तय करने के लिए ज्वाइंट एक्शन कमेटी की बैठक शुक्रवार को बुलाई गई है.

हालांकि क्रिसमस की वजह से 25 दिसंबर को बंद वापस ले लिया गया है लेकिन हैदराबाद और तेलंगाना क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में तनाव क़ायम है.

गुरुवार की रात तक विरोध प्रदर्शन और हिंसा की घटनाएं जारी रहीं.

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने कहा है कि तेलंगाना के गठन के लिए दूसरे राज्य पुनर्गठन आयोग की ज़रुरत नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन हिंसक रुप ले लेता है तो वे इसमें कुछ नहीं कर सकते.

इस बीच राज्य में पड़ोसी राज्यों और केंद्र से अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुँच गए हैं और वे सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों में जुट गए हैं.

इस्तीफ़े

इससे पहले तेलंगाना क्षेत्र से चुनकर आने वाले 13 सांसदों ने इस्तीफ़े दे दिए थे.

इनमें से 11 कांग्रेस के हैं और उन्होंने अपने इस्तीफ़े कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भिजवाए हैं. कांग्रेस के सिर्फ़ एक सांसद ने इस्तीफ़ा नहीं दिया है. वो हैं जयपाल रेड्डी. उन्होंने इस्तीफ़ा इसलिए नहीं दिया है क्योंकि वे मंत्रिमंडल के सदस्य हैं.

इसके अलावा राज्य विधानसभा के 93 सदस्यों ने भी अपने इस्तीफ़े विधानसभा अध्यक्ष को भिजवा दिए हैं. ये सभी तेलंगाना क्षेत्र से चुनकर आते हैं. वहाँ से 119 विधायक चुनकर आते हैं.

इन विधायकों में कांग्रेस, टीआरएस, टी़डीपी और भाजपा सभी दलों के सदस्य शामिल हैं. दो निर्दलियों ने भी इस्तीफ़े दिए हैं.

तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के चंद्रशेखर राव ने कहा है, "ये बैठक और प्रदर्शन चिदंबरम के बयान का जवाब हैं. हम सब एक हैं. हम चाहते हैं कि तेलंगाना क्षेत्र के सभी विधायक इस्तीफ़ा दे दें ताकि राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो जाए और रोसैया सरकार गिर जाए."

मीडिया भी निशाने पर

प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को कई टेलीविज़न चैनलों पर भी हमले किए हैं.

ज़्यादातर मीडिया ग्रुप शेष आंध्र प्रदेश से हैं और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये सभी टेलीविज़न चैनल निष्पक्ष ख़बरें नहीं दिखा रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने टेलीविज़न चैनलों की वैन पर पथराव भी किया.

कई इलाक़ों में केबल ऑपरेटरों के ज़रिए इन टेलीविज़न चैनलों के प्रसारण को रोक दिया गया है.

इस बीच टीआरएस नेता चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन के और हिंसक हो जाने की चेतावनी दी है.

उन्होंने कहा, "मैं क्या कर सकता हूँ. लाखों छात्रों को कौन इकट्ठा कर रहा है, कौन उनसे सड़कों पर आंदोलन करने को कह रहा है?"

चंद्रशेखर राव ने कहा, "जनता ख़ुद सामने आ रही है, राजनीतिक दल ख़ुद इसमें शामिल हो रहे हैं, उन्हें किसने उकसाया, पी चिदंबरम के बयान ने. केंद्र ने ग़लती की है."

उन्होंने सांसदों और विधायकों के इस्तीफ़ों को सही ठहराते हुए कहा कि अब के रोसैया को मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

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