'स्वायत्तता' के विरुद्ध जम्मू बंद

  • 28 दिसंबर 2009
सुरक्षाकर्मी
Image caption जम्मू क्षेत्र में कई जगह दुकानें बंद हैं और यातायात प्रभावित है

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र में स्वायत्तता के मुद्दे पर बुलाए गए बंद का आंशिक असर रहा है. प्रधानमंत्री द्वारा गठित पाँचवें वर्किंग ग्रुप के चेयरमैन जस्टिस (सेवानिवृत्त) सगीर अहमद ने अपनी रिपोर्ट में स्वायत्तता दिए जाने की सिफ़ारिश की है.

इस बंद का आहवान जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी, जम्मू राज्य मोर्चा और शिव सेना हिंदुस्तान ने किया था लेकिन जम्मू क्षेत्र के कुछ ज़िलों में ही इसका असर नज़र आया.

इन पार्टियों को केंद्र और राज्यों के रिश्तों पर काम कर रहे वर्किंग ग्रुप की सिफ़ारिशों पर कड़ी आपत्ति थी.

जम्मू क्षेत्र में सोमवार को कई जगहों पर दुकानों बंद हैं और वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है.

जम्मू और अन्य ज़िलों में बड़ी संख्या में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल को तैनात किया गया है. जम्मू स्थित पुलिस कंट्रोल रूम के अनुसार क्षेत्र के किसी भी हिस्से से फ़िलहाल हिंसा या किसी अप्रिय घटना की ख़बर नहीं मिली है.

ग़ौरतलब है कि चाहे भारतीय जनता पार्टी भी वर्किंग ग्रुप की सिफ़ारिशों का विरोध कर रही है लेकिन उसने ख़ुद को इस बंद से अलग किया हुआ है. इसका कारण जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी और भाजपा के बीच राजनीतिक मतभेद हैं.

हालांकि स्वायत्तता पर वर्किंग ग्रुप की सिफ़ारिश ने सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ़ेंस का मनोबल ज़रूर बढ़ाया है चाहे जम्मू में केंद्रित दलों को इन सिफ़ारिशों पर कड़ी आपत्ति है.

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