मेरे ख़िलाफ़ षड्यंत्र रचा गया: तिवारी

तिवारी
Image caption नारायण दत्त तिवारी का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक साजिश रची गई

सेक्स स्कैंडल में नाम आने के बाद आंध्रप्रदेश के राज्यपाल पद से इस्तीफ़ा देनेवाले नारायण दत्त तिवारी ने इसे झूठा और बेबुनियाद करार दिया है और कहा है कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया.

जिंदगी की आख़िरी दहलीज पर खड़े 87 साल के नाराय़ण दत्त तिवारी अब भी सार्वजनिक जीवन में बने रहना चाहते हैं और शायद इसीलिए बार फिर अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने के इरादे से देहरादून पहुंचे हैं.

वो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

हवाई अड्डे पर जहां उनके समर्थकों ने नारे लगाए कि 'तिवारी तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं' वहीं विरोधियों और महिला संगठनों ने उनके विरोध में धरना प्रदर्शन किया और पुतले फूँके.

लेकिन नारायण दत्त तिवारी के हाव-भाव से कहीं भी ऐसा नहीं प्रतीत हो रहा था कि वो अपमानित हैं या उन्हें किसी तरह का पछतावा है.

चलने-फिरने में वो भले ही अशक्त नजर आ रहे थे लेकिन बातचीत में उतने ही सजग और सतर्क. पेश है उनसे हुई बातचीत के अंश.

आपने राज्यपाल के पद से इस्तीफा क्यों दिया?

मुझे निजात मिली. वहां अलग राज्यों के कई संघर्ष चल रहे थे और मेरे ऊपर काफ़ी दबाव था. राजभवन को धमकियां मिल रही थीं कि तेलंगाना के समर्थन में केंद्र को लिख कर भेजिए. मेरी उम्र भी इतनी ज्यादा हो गई है और स्वास्थ्य भी ठीक नहीं.

लेकिन आपने चैनल पर सीडी दिखाए जाने के बाद इस्तीफ़ा क्यों दिया?

नहीं, मैंने काफ़ी पहले ही हाईकमान को बता दिया था और अपना इस्तीफ़ा भी भेज दिया था.

क्या आप सीडी प्रकरण के बाद अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं?

नहीं-नहीं काहे की ज़िम्मेदारी. मेरी क्या ज़िम्मेदारी है. ये तो इलेक्ट्रानिक तकनीक और कैमरे के खेल से बनाया गया है. अनैतिक काम तो उन्होंने किया है.

लेकिन सीडी में तो आप ही नज़र आते हैं?

हां, नज़र आते हैं लेकिन दो अलग-अलग स्थितियों को जोड़ा गया है और मेरे ख़िलाफ़ षड्यंत्र किया गया है.

आपके ख़िलाफ़ ही षड्यंत्र क्यों किया गया?

तेलंगाना को लेकर जो घमासान तल रहा था, उसकी छाया मुझ पर भी पड़ी. राजभवन को धमकियां मिल रही थीं. कुछ लोग विज्ञापन चाहते थे और मैं ऐसा नहीं कर सका. पता नहीं लोग राजभवन को क्या समझते हैं.

किन लोगों ने षड्यंत्र किया?

अब मुझे क्या पता, इसकी जांच होनी चाहिए. अब ज़िम्मेदार तो चैनल ही है और उसके ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी की गई है.

देहरादून में आपके आने और रहने का विरोध हो रहा है.

नहीं-नहीं मैं तो अभिभूत हूं, मेरे कार्यकर्ताओं ने जो स्नेह दिखाया है

लेकिन प्रदर्शन किए गए और पुतले फूंके गए.

मैं उनका शुक्रगुजार हूं ऐसा करके उन्होंने मेरी उम्र बढ़ा दी है.

बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले, आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बाद इस तरह आपकी विदाई, कैसा लग रहा है?

नहीं-नहीं कैसा संन्यास. हां उम्र तो लौटाई नहीं जा सकती.

आज़ादी के आंदोलन और गांधीजी के समय से आज तक...हालांकि लोगों ने गांधीजी को भी नहीं बख्शा था और लड़कियों के साथ उनके संबंध पर बातें बनाई जाती थीं.

इतना कहकर तिवारी नाटकीय ढंग से भावुक हो जाते हैं और संस्कृत के कुछ श्लोक सुनाने लगते हैं.

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