भारत सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करे: जापान

  • 29 दिसंबर 2009
जापान-भारत
Image caption जापान चाहता है कि भारत परमाणु अप्रसार पर पहल करे

जापान ने उम्मीद जताई है कि भारत जल्द ही व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि यानी सीटीबीटी पर हस्ताक्षर कर देगा.

तीन दिन की भारत यात्रा पर आए जापान के प्रधानमंत्री युकिओ हातोयामा ने मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं.

हातोयामा ने कहा कि मुझे उम्मीद है, ''अमरीका और चीन के साथ भारत भी जल्द सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करेगा और उसे अमल में लाएगा.''

हातोयामा ने कहा कि सीटीबीटी और परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी पर भारत के साथ मतभेद बरक़रार हैं.

लेकिन भारत ने इस पर अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पहले अमरीका और चीन को सीटीबीटी पर हस्ताक्षर करना चाहिए.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा,'' भारत ने परमाणु परीक्षण न करने का एक तरफ़ा फ़ैसला किया है. भारत जापान और समान विचारधारा वाले दूसरे देशों के साथ मिलकर परमाणु निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए गंभीरता से काम करने का इच्छुक है.''

पाबंदियों में ढील

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत जापान के साथ असैनिक परमाणु समझौता चाहता है.

इस पर जापानी प्रधानमंत्री ने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया और केवल इतना कहा कि भविष्य में ये बहुत महत्वपूर्ण एजेंडा बनेगा.

भारत की अप्रसार के प्रति ठोस प्रतिबद्धताओं को सराहते हुए हातोयामा ने उच्च प्रौद्योगिकी के कारोबार पर लगी पाबंदियों में ढील देने का वादा किया.

भारत जापान संबधों पर नज़र रखने वालों का मानना है कि आर्थिक कारणों से जापान जल्द ही भारत के साथ असैनिक परमाणु समझौता कर लेगा.

जापान में भारत के राजदूत रह चुके अर्जुन असरानी ने बीबीसी से बातचीत में कहा,'' जापान की जो आर्थिक स्थिति है जैसे कि सब विकसित देशों की समस्या है, वो नीचे की ओर जा रहे हैं, अब इस हालत में उनकी कंपनियां भारत में आने के लिए काफ़ी रुचि दिखाती हैं तो कब तक उनकी सरकार उन कंपनियों को रोकती रहेंगी. ये उनकी समस्या है, हमारे लिए तो अगर जापान परमाणु तकनीक नहीं देगा तो रूस, फ़्रांस और अमरीका देंगे.''

दोनों प्रधानमंत्रियों ने पश्चिमी मालवाहक गलियारा और दिल्ली मुंबई औद्यौगिक गलियारा परियोजना पर भी दस्तख़त किए.

संबंधित समाचार