तेलंगाना बंद को माओवादियों का समर्थन

  • 29 दिसंबर 2009
विरोध प्रदर्शन
Image caption अलग तेलंगाना की माँग दशकों पुरानी है पर राव के अनशन से इसे नई ताकत मिली

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन तेज़ हो गया है और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) ने भी 30 दिसंबर को बुलाए गए बंद को अपना समर्थन देने की घोषणा की है.

दूसरी ओर इस समस्या का हल खोजने के लिए केंद्र सरकार उच्च अधिकारियों की एक समिति का गठन करने पर विचार कर रही है.

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार उच्च अधिकारियों की एक समिति का गठन करने पर विचार कर रही है जो तेलंगाना की माँग से संबंधित सभी पक्षों से बातचीत करेगी. सूत्रों ने ये भी बताया है कि इस समिति को अपनी रिपोर्ट तीन महीने के भीतर सौंपनी होगी.

उधर तेलंगाना में अनेक जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है और कई बड़े राजमार्गों पर चक्का जाम कर दिया गया है और यातायात रुक गया है. राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता भी अनेक जगहों पर सड़कों पर उतर आई है.

ग़ौरतलब है कि अलग तेलंगाना राज्य की माँग वैसे तो दशकों पुरानी है लेकिन कुछ हफ़्ते पहले तेलंगाना राष्ट्रीय समिति के चंद्रशेखर राव ने भूख हड़ताल पर बैठकर इस ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया था और उनके अनशन के ग्यारहवें दिन केंद्र ने अलग तेलंगाना राज्य बनाने की माँग स्वीकार करने की घोषणा की थी.

लेकिन इसके विरोध में तटीय आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में संयुक्त आंध्र प्रदेश के पक्ष में प्रदर्शन और आंदोलन शुरु हुआ था. केंद्र सरकार ने दोबारा घोषणा करते हुए कहा था कि सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही अलग तेलंगाना राज्य पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बात होगी. इसके जवाब में तेलंगाना से निर्वाचित होने वाले 119 में से 93 विधायकों और राज्य के 13 मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया था और तेलंगाना ज्वाइंट एक्शन कमेटी का गठन हुआ है.

कई जगह यातायात ठप्प, तनाव

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता एम कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी ने बीबीसी को बताया, "सीपीआई माओवादी 30 दिसंबर के बंद का समर्थन करेगी. प्रमुख तौर पर यह समर्थन छात्रों की जारी गिरफ़्तारियों के ख़िलाफ़ है. साथ ही हम नए राज्यपाल ईएल नरसिम्हन को आंध्र का कार्यभार सौंपे जाने की निंदा करते हैं क्योंकि वे निर्दोष लोगों को निशाना बनाने के दोषी हैं. दो जनरवरी को पाँच राज्यों में माओवादियों के बंद का आहवान पहले ही किया जा चुका है और यह तेलंगान क्षेत्र में लागू होगा."

ग़ौरतलब है कि कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने यातायात ठप्प कर दिया है. वारंगल, हैदराबाद-विजयवाडा, करीमनगर-निज़ामाबाद, महबूबनगर-रायचूर और हैदराबाद-नागपुर राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

जहाँ राजनीतिक दलों और 65 ग़ैर-सरकारी संगठनों वाली तेलंगाना एक्शन कमेटी ने 30 दिसंबर को बंद का आहवान किया हुआ है वहीं उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने तीन जनवरी को हैदराबाद चलो रैली बुला रखी है.

उन्होंने क्लबों, होटलों और अन्य संस्थाओं से अनुरोध किया है नववर्ष से संबंधित सभी पार्टियों को रद्द किया जाए और इसकी जगह पर तेलंगाना चेतना दिवस मनाया जाए.

उधर हैदराबाद के पुलिस आयुक्त बी प्रसाद राव ने बीबीसी को बताया, "तीस दिसंबर से एक हफ़्ते के लिए हैदराबाद में धारा 144 लागू की जा रही है और ये पूरे शहर में लागू रहेगी. तीन जनवरी के लिए जो रैली बुलाई गई है, उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और लोगों से अनुरोध है कि वे हैदराबाद में न आएँ. नववर्ष की पार्टियों के लिए अतिरिक्त पुलिस बल का प्रबंध किया गया है."

हैदराबाद में मंगलवार को भी वकीलों ने रामोजी राव फ़िल्म सिटी में जारी नववर्ष की पार्टियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है और उन्हें जश्न मनाने से परहेज़ करने की चेतावनी दी है.

विजयवाडा में भारतीय जनता पार्टी ने अलग तेलंगाना राज्य के पक्ष में जय आंध अभियान शुरु किया है जबकि तेलंगाना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने विजयवाडा में भाजपा के दफ़्तर पर हमला किया है और तोड़फ़ोड़ की है.

वारंगल में भी विशाल प्रदर्शन हुए हैं और करीमनगर में 'रास्ता रोको' अभियान चल रहा है.

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