विस्थापितों के लिए कश्मीर में आरक्षण

कश्मीरी पंडित (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption चरमपंथ के उभार के बाद ज़्यादातर पंडितों को पलायन करना पड़ा था

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर सरकार ने कश्मीरी पंडितों की वापसी के प्रयासों के तहत उनके लिए तीन हज़ार सरकारी नौकरियाँ आरक्षित करने की घोषणा की है.

एक सरकारी बयान में कहा गया है कि राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कश्मीर से पलायन कर गए बेरोज़गार युवकों के लिए तीन हज़ार पदों की संस्तुति की है.

ये पद शिक्षा, समाज कल्याण, राहत संगठन, इंजीनियरिंग, वित्त, पर्यटन, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग में सृजित किए जाएंगे.

इसके लिए जम्मू कश्मीर (विशेष अभियान) भर्ती नियम संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गई है.

इसमें कहा गया है कि सरकार ने कश्मीर घाटी से पलायन कर गए लोगों की वापसी और उन्हें जीवनयापन के लिए सम्मानजनक साधन मुहैया करने के तहत ये क़दम उठाया है.

उल्लेखनीय है कि 1990 के दशक में कश्मीर में चरमपंथ के उभार के बाद ज़्यादातर पंडितों ने या तो अपने घर बेच दिए थे या उनके घरों को जला दिया गया था.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अप्रैल, 2008 में कश्मीर की यात्रा को दौरान एक विशेष पैकेज की घोषणा की थी.

उन्होंने कश्मीर से बाहर रह रहे हर परिवार को कश्मीर में घरों की मरम्मत के लिए साढ़े सात लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की थी.

साथ ही, जिन परिवारों के पास कश्मीर में किसी भी तरह की ज़मीन जायदाद नहीं है, उन्हें ज़मीन देने के साथ मकान बनाने के लिए सहायता राशि देने की भी घोषणा की थी.

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