अग्रिम ज़मानत पर सुनवाई परसों

रुचिका गिरहोत्रा
Image caption एसपीएस राठौर के खिलाफ़ मंगलवार को दो नए मामले दर्ज कराए गए हैं.

रुचिका गिरहोत्रा मामले में सज़ा पाए हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर की अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी पर सुनवाई पहली जनवरी को होगी.

रुचिका के भाई और पिता ने एसपीएस राठौर के ख़िलाफ़ मंगलवार रात पंचकुला के एक पुलिस थाने में दो नए मामले दर्ज कराए थे.

इनमें रुचिका के भाई को वाहन चोरी के फ़र्ज़ी मामलों में फँसाने, उनके साथ मारपीट करने और रुचिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेरबदल करने का आरोप लगाया गया है.

गिरफ़्तारी की संभावना

राठौर बुधवार को इन्हीं मामलों में अग्रिम ज़मानत लेने पंचकुला की ज़िला अदालत पहुँचे थे. उनके साथ उनकी पत्नी और वकील आभा भी थीं.

अदालत ने अग्रिम ज़मानत की अर्जी पर सुनवाई के लिए एक जनवरी को राठौर को एफ़आईआर की कॉपी के साथ बुलाया है.

इन दो नए एफ़आईआर के बाद अब राठौर के गिरफ़्तारी हो सकती है क्योंकि नए दर्ज मामलों में उन पर कई ग़ैर ज़मानती धाराएँ भी लगाई गई हैं.

रुचिका गिरहोत्रा एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थी. उन्होंने 1990 में शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारी राठौर ने उसके साथ छेड़छाड़ की है.

तीन साल बाद 1993 में अपने परिवार को परेशनी में पड़ता देख उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.

सीबीआई जाँच

पहले तो पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर एसपीएस राठौर के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

यह मामला 1997 में पुलिस के हाथ से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था. उसने 2000 में अपनी चार्जशीट दाख़िल की थी.

कुछ दिन पहले ही सीबीआई की एक अदालत ने राठौर को दोषी मानते हुए उन्हें छह जेल की महीने की सज़ा सुनाई है.

सज़ा सुनाए जाने के बाद ही राठौर को ज़मानत मिल गई थी. रुचिका के परिवार ने राठौर को मिली सज़ा को काफी कम बताया था.

मंगलवार को रुचिका की पुण्यतिथि थी. इस अवसर पर उनके मित्रों और शुभचिंतकों ने शांति मार्च निकाला और उसकी याद में दीप जलाए.

वहीं एक ग़ैर सरकारी संगठन ने राठौर की सज़ा बढ़ाने और मामले को खुलवाने के के लिए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है.

दूसरी ओर राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी कहा है कि उसने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि इस मामले की नए सिरे से जाँच करवाई जाए.

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