अलविदा 2009, स्वागत 2010

वर्ष 2009 विदा हो गया है और छोड़ गया है, यादें.

माना जा रहा है कि नया साल नई खुशियां, नई उमंग, नई उम्मीदें और जश्न मनाने के नए कारण लेकर आया है.

धरती पर नए साल के क़दम आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़े. सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया में पहुँचा नया वर्ष जहाँ इसका ज़ोरदार स्वागत हुआ.

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में जैसे ही घड़ी की सुई ने रात के 12 बजाए, आसमान में आतिशबाज़ी की झड़ी लग गई.

यहाँ आकर्षण का केंद्र था सिडनी का हार्बर ब्रिज जहाँ लाखों लोगों ने इस नज़ारे को देखा.

भारत समेत एशियाई देशों मे भी नववर्ष का धमाकेदार स्वागत हुआ.

हांगकांग में प्रसिद्ध विक्टोरिया बंदरगाह के आसपास विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया.

उम्मीद की जा रही है कि 2010 उत्साह और उमंग से सजा होगा.

इस वर्ष भारत में कुछ विशेष आयोजन होने जा रहे है. इनमें राष्ट्रमंडल खेल और कुंभ प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं.

भारत में जनवरी में हरिद्वार में 12 वर्ष बाद महाकुंभ होने जा रहा है तो अक्तूबर 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारियाँ जोरों पर हैं.

चंद्रग्रहण

ये विचित्र है कि 2009 का अंत और 2010 की शुरुआत चंद्र ग्रहण से हुई.

पिछली एक शताब्दी में शायद ये पहला मौक़ा है जब नए साल का स्वागत चंद्रग्रहण से हो रहा है.

चंद्रग्रहण से लोगों के मन में नए साल को लेकर कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं.

नए साल में चंद्र ग्रहण के बाद पंद्रह दिन के भीतर ही 15 जनवरी को सूर्यग्रहण भी होगा.

कई नए साल

भारत ही ही दुनिया के कई देशों में कई बार नए साल के मौक़े आते हैं.

दिलचस्प तथ्य ये है कि दुनिया भर में अनेक कैलेंडर है और हर कैलेंडर का नया साल अलग अलग होता है.

भारत में ही पंचाग के हिसाब से नया साल अलग होता है. लेकिन एक जनवरी को नया साल मनाने वालों की बड़ी संख्या है.

एक जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है.

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