राजेंद्र अवस्थी का निधन

राजेंद्र अवस्थी
Image caption राजेंद्र अवस्थी ने सारिका, नंदन और कादम्बिनी जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया.

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार राजेंद्र अवस्थी के निधन पर देश के जाने-माने साहित्यकारों और पत्रकारों ने शोक जताया है.

उनका बुधवार को लंबी बीमारी के बाद नई दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था. वे करीब 80 साल के थे.

क़रीब पांच-छह महीने पहले ही उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी. वे पिछले काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे और उनके महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. अस्पताल में उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था.

उनके परिवार में तीन बेटे और दो बेटियाँ हैं.

साहित्यकार-पत्रकार

मध्य प्रदेश के जबलपुर में 25 जनवरी 1930 को पैदा हुए राजेंद्र अवस्थी ने पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य रचना करते हुए कई किताबें भी लिखीं थी.

उन्होंने सारिका, नंदन, साप्ताहिक हिंदुस्तान और कादम्बिनी जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया.

राजेंद्र अवस्थी ने जिन उपन्यासों की रचना की उनमें 'सूरज किरण की छांव', 'जंगल के फूल', 'जाने कितनी आंखें', 'बीमार शहर', 'अकेली आवाज़' और 'मछली बाज़ार' के नाम शामिल हैं.

राजेद्र अवस्थी अपने तंत्र-मंत्र प्रेम के लिए भी जाने जाते थे.

वे 'ऑथर गिल्ड ऑफ़ इंडिया' के अध्यक्ष भी रहे. दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने उन्हें 1997-98 में साहित्यिक कृति से सम्मानित किया था.

देश के जाने-माने साहित्यकारों ने इसे हिंदी साहित्य और पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति बताया है.

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने राजेंद्र अवस्थी के निधन पर शोक जताते इसे आर्दश पत्रकारिता की गहरी क्षति बताया. उन्होंने कहा कि अवस्थी के निधन से पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्य जगत में भी ख़ालीपन आ गया है.

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