बिली अर्जन सिंह का निधन

बिली अर्जन सिंह
Image caption बिली अर्जन सिंह का संबंध कपूरथला रियासत से था

भारत के मशहूर वन्य जीव विशेषज्ञ बिली अर्जन सिंह का निधन हो गया है. वे 92 वर्ष के थे.

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले के दुधवा नेशनल पार्क के पास स्थित अपने फ़ॉर्म हाउस पर शुक्रवार शाम को उन्होंने अंतिम साँस ली.

15 अगस्त 1917 को गोरखपुर में जन्मे बिली अर्जन सिंह का संबंध कपूरथला रियासत से था.

बिली अर्जन सिंह को पद्म श्री, पद्म भूषण और पॉल गेटी (पर्यावरण के क्षेत्र का नोबेल माना जाने वाला पुरस्कार) को मिल चुका था.

वन्य जीव प्रेम

सेना में लेफ़्टिनेंट रह चुके बिली अर्जन सिंह ब्रिटिश इंडिया आर्मी के लिए काम कर चुके थे और दूसरे विश्व युद्ध में भी उन्होंने हिस्सा लिया था. वर्ष 1946 में वे लेफ़्टिनेंट के रूप में रिटायर हुए थे.

बिली अर्जन सिंह ने वन्य जीव संरक्षण पर कई किताबें लिखीं और दुधवा नेशनल पार्क में बाघों के संरक्षण के लिए उन्होंने जो काम किया, उसके लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले.

वर्ष 1995 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया. जबकि 2004 में उन्हें जे पॉल गेटी वन्य जीव संरक्षण पुरस्कार मिला. जबकि 2006 में उन्हें पद्म भूषण मिला.

माना जाता है कि बिली अर्जन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वन्य जीव संरक्षण के लिए कई क़दम उठाने को प्रेरित किया था.

बाघों के संरक्षण को लेकर उनका प्रेम इसी से जग-जाहिर होता है कि उन्होंने अपने फॉर्म हाउस का नाम 'टाइगर हैवेन' रखा था.

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