राठौर को मिली अग्रिम ज़मानत

  • 1 जनवरी 2010
रुचिका गिरहोत्रा
Image caption एसपीएस राठौर के खिलाफ़ दो नए मामले दर्ज कराए गए हैं.

रुचिका गिरहोत्रा मामले में हरियाणा पुलिस के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को सात जनवरी तक अंतरिम अग्रिम ज़मानत मिल गई है.

रुचिका के भाई और पिता ने एसपीएस राठौर के ख़िलाफ़ 29 दिसंबर की रात को पंचकुला के एक पुलिस थाने में दो नए मामले दर्ज कराए थे.

इनमें रुचिका के भाई को वाहन चोरी के फ़र्ज़ी मामलों में फँसाने, उनके साथ मारपीट करने और रुचिका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेरबदल करने का आरोप शामिल था.

इसके बाद 31 दिसंबर को रुचिका के भाई आशु ने ये आरोप भी लगाया कि पुलिस हिरासत में उन्हें प्रताड़ित किया गया था.

आरोप

राठौर ने अग्रिम ज़मानत के लिए पंचकुला की ज़िला अदालत में अर्ज़ी डाली थी.

अदालत ने अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी पर सुनवाई के लिए एक जनवरी को राठौर को बुलाया था.

पहले आशंका जताई जा रही थी कि दो नए एफ़आईआर के बाद राठौर की गिरफ़्तारी हो सकती है क्योंकि नए दर्ज मामलों में उन पर कई ग़ैर ज़मानती धाराएँ भी लगाई गई हैं.

रुचिका गिरहोत्रा एक उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी थी. उन्होंने 1990 में शिकायत की थी कि पुलिस अधिकारी राठौर ने उसके साथ छेड़छाड़ की है.

तीन साल बाद 1993 में रुचिका ने त्महत्या कर ली थी. कुछ दिन पहले ही सीबीआई की एक अदालत ने राठौर को दोषी मानते हुए उन्हें छह जेल की महीने की सज़ा सुनाई थी लेकिन उन्हें उसी दिन ज़मानत पर छोड़ दिया गया.

पहले तो पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर एसपीएस राठौर के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया था.

यह मामला 1997 में पुलिस के हाथ से लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया था. उसने 2000 में अपनी चार्जशीट दाख़िल की थी.

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