तेलंगाना पर कांग्रेस में घमासान

के रोसैया
Image caption तेलंगाना के मुद्दे पर रोसैया असहाय से दिखाई देते हैं

अलग तेलंगाना राज्य के मसले पर आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी क्षेत्रीयता के आधार पर बँट गई है और सीधे मुख्यमंत्री के रोसैया के ख़िलाफ़ भी आरोप प्रत्यारोप शुरु हो गए हैं.

तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस नेताओं ने जहाँ मुख्यमंत्री रोसैया के रवैये पर सवाल उठाया है और कहा है कि शेष आंध्र से होने की वजह से वे तेलंगाना का विरोध कर रहे हैं.

जबकि शेष आंध्र प्रदेश के नेताओं ने कहा है कि तेलंगाना के नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए.

इस बीच राज्य के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के वेंकटरेड्डी को पार्टी हाई कमान ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उन पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की आलोचना करके पार्टी अनुशासन तोड़ा है.

मंत्री ने कहा है कि उन्हें नोटिस मिला नहीं है. नोटिस मिलते ही वो इसका जवाब देंगे. हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बारे में कुछ ग़लत नहीं कहा है, वे तो लोगों की भावनाओं को प्रकट कर रहे थे.

अब इस मसले में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव के केशव राव भी कूद पड़े हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ सवाल खड़े किए हैं.

विवाद

तेलंगाना के जिन 13 मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया था उनमें सूचना टेक्नॉलॉजी मंत्री के. वेंकटरेड्डी भी थे.

शेष सभी मंत्रियों ने तो अपने इस्तीफ़े वापस ले लिए लेकिन के वेंकट रेड्डी ने इस्तीफ़ा वापस लेने से इनकार कर दिया है.

उन्होंने मुख्यमंत्री के रोसैया पर आरोप लगाया है, "रोसैया शेष आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की तरह बर्ताव कर रहे हैं."

उनके इस बयान से कांग्रेस के भीतर खलबली मच गई और कुछ कांग्रेस नेताओं ने उनके ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की.

इसका जवाब देते हुए तेलंगाना क्षेत्र के एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता दामोदर रेड्डी ने कहा, "आज अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात हो रही है, जब तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के कांग्रेस नेताओं ने इस्तीफ़े दिए थे तब ऐसी मांग करने वाले कहाँ थे."

उन्होंने कहा है कि यदि किसी भी नेता के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

इस बीच एआईसीसी के सचिव के केशव राव ने दिल्ली में एक पत्रवार्ता बुलाकर के रोसैया के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है.

उन्होंने पूछा, "नौ दिसंबर को केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने घोषणा की थी कि मुख्यमंत्री तेलंगाना के लिए संघर्ष करने वाले लोगों और छात्रों के ख़िलाफ़ दर्ज पुलिस केस वापस ले लेंगे लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है, क्यों?"

उन्होंने पूछा कि अब मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि वे मामले वापस लेने के लिए राज्यपाल ई नरसिंम्हन से बात करेंगे, तो मुख्यमंत्री को इसकी क्या ज़रुरत है.

बैठक का विरोध

उधर शेष आंध्र में केंद्र सरकार की बैठक का भी विरोध शुरु हो गया है.

एक वरिष्ठ नेता जी वेंकटरेड्डी ने कहा है कि पाँच जनवरी को दिल्ली में बुलाई गई बैठक का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि यह राज्य का मामला है और इसे राज्य में ही सुलझाया जाना चाहिए.

उनका सुझाव था कि एक स्वतंत्र समिति बनाकर अलग राज्य के गठन का मसला उसके हवाले कर देना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी अपने घोषणा पत्र में या कहीं और तेलंगाना राज्य बनाने का वादा नहीं किया था.

इसके जवाब में एआईसीसी के सचिव केशव राव ने कहा कि वर्ष 2004 के चुनाव घोषणा पत्र में कांग्रेस ने कहा था कि वह पहले राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट पर विचार करेगी जिसमें सुझाव दिया गया था कि अलग तेलंगाना राज्य का गठन कर देना चाहिए.

टीडीपी में भी

Image caption तेलंगाना के लिए राज्य में हिंसक आंदोलन हुए हैं

इस बीच तेलगुदेशम पार्टी (टीडीपी) में भी मतभेद सामने आ रहे हैं.

तेलंगाना क्षेत्र से राजनीति करने वाले ई दयाकर राव शुक्रवार को अपने नेता चंद्रबाबू नायडू के पैरों पर यह कहते हुए गिर पड़े कि वे तेलंगाना राज्य के गठन का विरोध न करें.

तो दूसरी ओर टीडीपी के वरिष्ठ नेता येरन नायडू ने कहा कि आंध्र की अधिसंख्य जनता अलग राज्य के गठन का विरोध कर रही है इसलिए अलग तेलंगाना राज्य का गठन नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने तेलंगाना राष्ट्र समिति के साथ मिलकर तेलंगाना पर विवाद खड़ा करने का षडयंत्र रचा है."

उनका कहना था कि दोनों पार्टियाँ तेलंगाना की आड़ ने राजनीतिक लाभ उठाना चाहती हैं.

उल्लेखनीय है कि तेलंगाना के मसले पर टीडीपी के विधायकों ने भी इस्तीफ़े दिए थे और इससे पहले शेष आंध्र प्रदेश के टीडीपी विधायकों ने इस्तीफ़े दिए थे.

छात्रों का आंदोलन

तेलंगाना के मुद्दे पर छात्रों ने तीन जनवरी को हैदराबाद में एक बडी़ रैली करने का ऐलान किया है.

उनका दावा है कि इस रैली में पाँच लाख छात्र हिस्सा लेंगे.

लेकिन प्रशासन ने अभी तक इस रैली की अनुमति नहीं दी है. प्रशासन का कहना है कि इस रैली से शांति भंग हो सकती है.

कुछ छात्र प्रशासन के इस रवैये का विरोध करते हुए हुसैन सागर झील के बीच में बने बुद्ध की प्रतिमा तक पहुँच गए हैं और वहाँ अनशन शुरु कर दिया है.

उनका कहना है कि जब तक प्रशासन रैली की अनुमति नहीं देगा, वे अनशन करते रहेंगे.

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