नए अंदाज़ में मना नव वर्ष

तेलंगाना

आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच कई पाँच सितारा होटलों और क्लबों में पाश्चात्य संगीत और गीतों की धुन पर नाचते-गाते लोगों ने नव वर्ष 2010 को गले लगाया.

लेकिन अलग राज्य की लड़ाई लड़ने वाले तेलंगाना क्षेत्र में लोगों ने यह जश्न एक अनूठे और अलग अंदाज़ में मनाया. हैदराबाद के ओस्मानिया विश्वविद्यालय में हज़ारों छात्रों ने इस अवसर पर 'तेलंगाना जागरण' आयोजित किया, मोमबतियाँ जलाईं, तेलंगाना क्षेत्र की अलग सांस्कृतिक झाँकियाँ प्रस्तुत कीं, क्रांतिकारी गीत गए और तेलंगाना के पक्ष में नारों से रात भर यह कैम्पस गूंजता रहा. कुछ ऐसे ही दृश्य वारंगल के काकतीय विश्वविद्यालय, निज़ामाबाद के तेलंगाना विश्वविद्यालय और प्रांत के दूसरे विश्वविद्यालयों में देखने को मिले जहाँ हज़ारों छात्रों ने इन कार्यक्रमों में भाग लिया और 2010 को तेलंगाना राज्य की स्थापना का वर्ष बनाने की प्रतिज्ञा की. तेलंगाना वालों की यह शिकायत है की आंध्र वालों की अलग अंदाज़ की तेलुगू भाषा और अलग संस्कृति ने तेलंगाना की संस्कृति, यहाँ के अलग रहन-सहन, खान-पान और उनके त्यौहारों को भी मिटा दिया है.

कोशिश

इस अवसर पर ओस्मानिया विश्वविद्यालय और दूसरे स्थानों पर तेलंगाना की महिलाओं और कलाकारों ने उस संस्कृति को ज़िंदा करने की कोशिश की.

महिलाओं ने बतकम्मा और बोनाल का त्यौहार मनाया, गीत गए और नृत्य पेश किया. साथ ही कलाकारों ने ऐसे क्रांतिकारी गीत भी प्रस्तुत किए, जिन्हें सुनकर लोग झूम उठे.

इन गीतों में उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई जिन्होंने तेलंगाना राज्य के लिए गत पचास वर्षों में अपने प्राणों की आहुति दी थी. हालाँकि ओस्मानिया के छात्रों के इस आह्वान पर कि लोग नव वर्ष का जश्न न मनाएं, तनाव उत्पन्न हो गया था और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे लेकिन शहर में और उसके आसपास कोई अप्रिय घटना नहीं हुई.

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