फ़रार अपराधियों पर ईनाम

  • 3 जनवरी 2010
फ़रार होने वाले अपराधी
Image caption शुक्रवार को दिल्ली पुलिस को चकमा देकर ये तीनों अपराधी फ़रार हो गए थे

दिल्ली पुलिस ने कथित रुप से फ़रार होने वाले तीन पाकिस्तानी अपराधियों के बारे में जानकारी देने वालों को 50-50 हज़ार रुपए के ईनाम की घोषणा की है.

फ़रार होने वाले अपराधियों को वर्ष 2000 में लाल क़िला के नज़दीक हुए धमाके के सिलसिले में दोषी पाया गया था. अदालत ने जो सज़ा सुनाई थी तीनों उसे काट चुके हैं.

ग़ौरतलब है कि लाल क़िला धमाके के मुख्य आरोपी मोहम्मद आरिफ़ उर्फ़ अशफ़ाक हैं जिन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है.

शुक्रवार को सज़ा काट चुके इन अपराधियों को गुरुनाक आई सेंटर में चेकअप के लिए लाया गया था, लेकिन अस्पताल से निकलने के बाद खाना खाते समय ये कथित रुप से पुलिस को चकमा देकर भाग निकलने में कामयाब हो गए.

रविवार को दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता राजन भगत ने बीबीसी को बताया, "हमने इन तीनों आतकंवादियों के बारे में जानकारी देने वालों को 50-50 हज़ार के ईनाम की घोषणा की है, हमने इनकी तस्वीरें भी जारी की है."

फ़रार होने वाले अपराधियों के ख़िलाफ़ शनिवार को नया मामला भी दर्ज किया गया और पुलिस के अनुसार इस पहलू की जाँच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में ये भाग निकलने में कामयाब हुए.

मामला

ये अपराधी ऐसे समय में फ़रार हुए हैं जब दो अपनी सज़ा पिछले अप्रैल और एक अक्तूबर में पूरी कर चुके थे और उन्हें पाकिस्तान भेजने की प्रक्रिया जारी थी.

वर्ष 2002 में पुलिस ने लाल क़िला धमाके के सिलिसले में अब्दुल रज़्ज़ाक़, मोहम्मद सादिक़ और रफ़ाक़्त अली को गिरफ़्तार किया था. ये तीनों मूल रुप से पाकिस्तानी नागरिक हैं.

सादिक़ का संबंध पंजाब के सियालकोट से है, रफ़ाक़्त अली का संबंध लाहौर के बतापुर से जबकि रज़्ज़ाक़ लाहौर के नरवाल के रहने वाले हैं.

सादिक़ और रफ़ाक़त अली पर देश के ख़िलाफ़ युद्ध, हत्या की कोशिश, साज़िश और विस्फ़ोटक अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत सज़ा दी गई था जबकि रज्ज़ाक़ को मादक पदार्थ रखने का दोषी पाया गया था.

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