बसु का हरसंभव इलाज होगाः मनमोहन

ज्योति बसु और बुद्धदेब भट्टाचार्य (फाइल)

जानेमाने मार्क्सवादी नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु को देखने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह गुरुवार को कोलकाता पहुँचे.

बसु का इलाज़ कर रहे डॉक्टरों के मुताबिक़ उनकी हालत अभी भी काफ़ी गंभीर बनी हुई है. डॉक्टरों का एक उच्चस्तरीय दल उनके स्वास्थ्य की शुक्रवार को समीक्षा करेगा और इसके बाद शुक्रवार को दिन में 11.30 बजे स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों से इलाज की जानकारी ली और उन्हें आश्वासन दिया कि अगर बसु के इलाज़ के लिए देश के किसी भी हिस्से से विशेषज्ञ को बुलाने की ज़रूरत पड़ी तो इसकी व्यवस्था की जाएगी.

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने प्रधानमंत्री की डॉक्टरों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों से इलाज़ प्रक्रिया की जानकारी ली और उन्हें आश्वासन दिया कि अगर बसु के इलाज़ के लिए देश के किसी भी हिस्से से किसी विशेषज्ञ को बुलाने की ज़रूरत पड़ी और उन्हें इसकी सूचना दी गई तो वे इसकी व्यवस्था करेंगे.’’

अस्पताल में मौज़ूद चटर्जी ने बताया कि डॉक्टरों ने प्रधानमंत्री से कहा कि अगर इसकी ज़रूरत पड़ी तो वे इसकी सूचना उन्हें देंगे.

प्रधानमंत्री के साथ अस्पताल में वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी, राज्य के मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति के अध्यक्ष प्रदीव भट्टाचार्य भी थे.

प्रधानमंत्री अस्पताल में क़रीब 20 मिनट तक रहे. चटर्जी के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने बसु के बेटे चंदन से बात की और बसु के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.

स्थिति में सुधार नहीं

बसु का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने गुरुवार सुबह बताया कि बुधवार शाम हालत में कुछ सुधार नज़र आया था लेकिन गुरुवार को कोई सुधार नहीं दिखा है. उन्हें अभी भी वेंटीलेटर या जीवनरक्षक मशीन का सहारा दिया जा रहा है.

डॉक्टरों ने बताया कि उनके रक्तचाप में काफ़ी उतार चढ़ाव-दिख रहा है. उन्हें अभी भी वही दवा दी जा रही है जो शुरुआत में दी गई थी. बसु को नली के जरिए तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं.

बसु, जिनकी उम्र 96 की हो चुकी है, को शुक्रवार को निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पताल में दाखिल कराया गया था. उन्हें गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया है. उनकी स्थिति की जाँच के लिए एक ख़ास मेडिकल बोर्ड भी बनाया गया है. ज्योति बसु वर्तमान भारतीय राजनीति के बड़े व्यक्तित्वों में से एक हैं. उनके पास 1996 में एक बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर आया था लेकिन पार्टी के फ़ैसले के मुतीबिक़ उन्होंने इनकार कर दिया था.

वे पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा सरकार में लगातार 23 साल तक मुख्यमंत्री के रूप में काम करते रहे.

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