अनिवासी भारतीयों को मताधिकार जल्द: मनमोहन

मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन सिंह ने भारतीय छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि अनिवासी भारतीयों को मताधिकार देने के लिए सरकार प्रयास तेज़ करेगी.

प्रवासी भारतीय दिवस पर चल रहे कार्यक्रमों के दौरान अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अगले आम चुनाव तक अनिवासी भारतीयों को मताधिकार दिलाने की हरसंभव कोशिश करेगी.

उन्होंने कहा कि अनिवासी भारतीयों के लिए मताधिकार की मांग उचित है.

मनमोहन सिंह ने कहा, "मैं विदेश में रह रहे भारतीयों की इच्छा का सम्मान करता हूँ जो मतदान में हिस्सा लेना चाहते हैं. मैं इस मामले पर काम कर रहे हैं. मैं उम्मीद करता हूँ कि अगले आम चुनाव से पहले उन्हें मतदान का अधिकार मिल पाएगा."

प्रधानमंत्री ने विदेश में रह रहे भारतीयों से अपील की कि वे स्वदेश आकर राजनीति में शामिल हों.

प्रधानमंत्री की इस घोषणा का अनिवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों ने ज़ोरदार स्वागत किया है लेकिन अभी ये स्पष्ट नहीं है कि विदेशी नागरिकता ले चुके लोगों को यह अधिकार हासिल होगा या नहीं.

भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अमरीका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों के लोगों ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ़ इंडिया (ओसीआई) की सुविधा प्रदान की है जिसके तहत उन्हें भारतीय नागरिकों की ही तरह सारे अधिकार हासिल हैं लेकिन उन्हें अब तक वोट डालने का अधिकार नहीं है.

माना जा रहा है कि विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों के अलावा ओसीआई वर्ग के लोगों को भी यह अधिकार मिल सकता है लेकिन इस मामले पर स्थिति स्पष्ट नहीं है.

चुनाव लड़ने के भी अधिकार?

प्रधानमंत्री ने विदेश में बसे भारतीय लोगों से स्वदेश आकर राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने की जो बात कही है उसकी वजह से ये अनुमान भी लगाया जा रहा है कि इस वर्ग के लोगों को चुनाव में वोट डालने की ही नहीं, बल्कि चुनाव लड़ने के भी अधिकार मिल सकते हैं.

प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद प्रवासी भारतीय दिवस में शामिल होने के लिए अमरीका से होटल व्यवसायी संत चटवाल ने कहा, "यह बहुत ही अच्छा फ़ैसला है, भारत के बहुत सारे लोग भारत की राजनीतिक प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहते हैं, वे चाहते हैं कि भारत को चलाने के मामले उनकी राय हो, यह सरकार का स्वागत योग्य फ़ैसला है, मैं इससे बहुत ख़ुश हूँ."

सऊदी अरब में रहने वाले सैयद ज़िया उर रहमान ने कहा, "यह बहुत अच्छा क़दम है लेकिन भारत सरकार को इसे सही तरीक़े से लागू करने के लिए बहुत काम करना होगा और भारतीय दूतावासों के ज़रिए मतदाता सूची को दुरुस्त करना होगा जो कि बहुत बड़ा काम है."

मलेशिया से आए पी उदयकुमार ने कहा, "यह फ़ैसला देखने में तो बहुत अच्छा लग रहा है और इसके बहुत दूरगामी परिणाम होंगे, अभी कुछ कहना मुश्किल है कि किस देश में रहने वाले व्यक्ति के लिए इसके क्या मायने होंगे. "

इस मौक़े पर प्रधानमंत्री ने नई वेबसाइट का उदघाटन किया जिसे 'ओवरसीज़ इंडियन फ़ेसिलिटेशन सेंटर' कहा जा रहा है जिसके बारे में कहा जा रहा है कि इसकी मदद से विदेशों में बसे भारतीय व्यवसायी भारत में आसानी से निवेश कर सकेंगे.

दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 'इनगेजिंग डायस्पोरा' (विदेशी में बसने वाले लोगों से संवाद) के तहत ढेर सारी परिचर्चाएँ आयोजित की गई हैं, इन परिचर्चाओं में विदेश मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, विधि मंत्री सहित कई कैबिनेट मंत्री हिस्सा ले रहे हैं.

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में 50 से ज़्यादा देशों के क़रीब 1500 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.

समझा जाता है कि लगभग ढाई करोड़ अनिवासी भारतीय 130 देशों में रह रहे हैं.

प्राथमिकता

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हो रहे हमलों को गंभीरता से लेती है.

उन्होंने कहा कि विदेश में भारतीय छात्रों की सुरक्षा सरकार के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अन्य मुद्दों का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि आधारभूत क्षेत्र, शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य सरकार के लिए प्राथमिकता हैं.

उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले कुछ वर्षों में नौ या दस प्रतिशत विकास दर हासिल की जा सकती है.

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