राठौर की ज़मानत याचिका ख़ारिज

  • 8 जनवरी 2010
रुचिका
Image caption रुचिका ने वर्ष 1993 में आत्महत्या कर ली थी

हरियाणा में पंचकुला की एक अदालत ने रुचिका मामले में पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपीएस राठौर की अग्रिम ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है.

रुचिका के परिवार की ओर से मामले की बहस कर रहे वकील पंकज भारद्वाज ने अदालत से बाहर आकर कोर्ट के फैसले के बारे में पत्रकारों को जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि अदालत ने एसपीएस राठौर की अग्रिम ज़मानत की याचिका को ख़ारिज कर दिया है और अब यह राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि उन्हें तत्काल हिरासत में लिया जाए.

उन्होंने बताया कि अब राठौर की गिरफ़्तारी में कुछ दिन नहीं, बल्कि कुछ घंटों का वक़्त बचा है.

हालांकि उन्होंने बताया कि राठौर के पास अब हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने का विकल्प बचा हुआ है.

अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश संजीव जिंदल ने गुरुवार को दोनों पक्षों की बातें सुनीं थीं और बताया था कि शुक्रवार को इस अग्रिम याचिका पर फैसला सुनाया जाएगा.

रुचिका गिरहोत्रा छेड़छाड़ मामले में एसपीएस राठौर को दोषी ठहराते हुए दिसंबर में सज़ा सुनाई गई थी, फिर उन्हें ज़मानत भी मिल गई थी.

लेकिन बाद में एसपीएस राठौड़ के ख़िलाफ़ दो नए एफ़आईआर दर्ज किए गए हैं, जिनमें उन पर हत्या के लिए उकसाने, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साज़िश के मामले दर्ज किए गए हैं.

राठौड़ ने इसके बाद अग्रिम ज़मानत की याचिका दायर की है. एसपीएस राठौर की पत्नी और उनकी वकील आभा राठौर ने अदालत में तर्क दिया कि धारा 306 के तहत दर्ज मामले को पहले सुप्रीम कोर्ट ख़ारिज कर चुका है.

आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया का इस्तेमाल करके और राज्य सरकार पर दबाव बनाकर इस मामले को फिर से शुरू किया जा रहा है.

दूसरी ओर गिरहोत्रा परिवार की ओर से इस मामले में वकील ने तर्क दिया कि एसपीएस राठौर ने ही रुचिका को आत्महत्या के लिए उकसाया.

अगस्त 1990 में 14 वर्षीय रुचिका गिरहोत्रा के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया था. उस समय एसपीएस राठौर हरियाणा पुलिस में महानिरीक्षक थे और साथ ही पंचकुला में हरियाणा लॉन टेनिस एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे.

इस घटना के तीन साल बाद अगस्त 1993 में रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी.

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