सोनिया, राहुल वोट डालने नहीं पहुँचे

  • 8 जनवरी 2010

वो चुनाव आने पर रोड शो करते हैं, आम आदमी के वोट की ताक़त उसे याद दिलाते हैं और लोकतंत्र के हाथों को मज़बूत करने के लिए मतदान करने की अपील करते हैं.

लोग उनकी बातों को सुनते हैं, अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं और वोट देते हैं. देश की शीर्ष गद्दी पर उन्हें बैठाते हैं, अपनी ज़िम्मेदारी निभाकर उन्हें ज़िम्मेदार पदों पर बैठाते हैं.

पर क्या नेता ख़ुद वोट की इस क़ीमत को समझते हैं जब बारी उनके अपने मतदान की आती है.

कम से कम गुरुवार को उत्तर प्रदेश में संपन्न हुए विधान परिषद चुनावों के लिए मतदाताओं की सूची को देखकर ऐसा नहीं लगता.

हालांकि राज्य की मुख्यमंत्री मायावती और कई अन्य दलों के वरिष्ठ नेताओं ने तो विधान परिषद के लिए मतदान किया पर कांग्रेस और यूपीए की प्रमुख सोनिया गांधी और कांग्रेस के युवा चेहरे राहुल गांधी मतदान करने नहीं पहुँचे.

सोनिया गांधी रायबरेली से सांसद हैं और राहुल अमेठी से.

जब मेरी रायबरेली संसदीय क्षेत्र के कुछ लोगों से इस बारे में बातचीत हुई तो उन्होंने कहा कि जनपद का जब तब दौरा करने वाले गांधी परिवार के सदस्य वोट देने नहीं पहुँचे, यह दुखद ही है.

इस बाबत दिल्ली स्थित संसदीय क्षेत्र कार्यालय से संपर्क करने पर पता चला कि सोनिया गांधी गुरुवार को यानी मतदान के दिन दिल्ली में ही थीं और राहुल गांधी देश से बाहर यात्रा पर निकले हुए हैं.

एक स्थानीय पत्रकार इस बाबत कहते हैं, "जब आम लोगों के वोट की ज़रूरत होती है तो यही नेता ज़िले की सड़कों पर घूम-घूमकर लोगों से वोट मांगते हैं पर अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की बारी आई तो पीछे रह गए. ऐसे में लोकतंत्र को मज़बूत करने के इनके भाषण झूठे नहीं हो जाते क्या."

हालांकि गांधी परिवार की ओर से इस मतदान में न पहुँच पाने के लिए कुछ न कुछ व्यस्तता का कारण गिना ही दिया जाएगा. ऐसे बड़े राजनीतिक परिवार के लिए कोई कारण खोज निकालना बड़ी बात भी नहीं है.

पर बिना बताए औचक दौरा करने वाले, बात-बात पर दलितों, पिछड़ों के घर पहुँच जाने वाले, रात ग़रीबों के घर बिताकर उदाहरण बनने की कोशिश करने वाले ये नेता अपनी व्यस्तताओं में मतदान के लिए भी कार्यक्रम बना सकते थे. इससे लोकतंत्र को मज़बूती ही मिलती.

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