मायावती के जन्मदिन पर जश्न

मायावती के जन्मदिन पर कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती जो भी काम करती हैं, बड़े पैमाने पर और शानदार तरीक़े से करती हैं.

इसलिए उनका 54वाँ जन्मदिन भी सरकारी तौर पर राजधानी लखनऊ और सभी 71 ज़िलों में ज़ोरदार तरीक़े से मनाया गया.

राजधानी की मुख्य सडकों और चौराहों को बिजली की नीली रोशनी से सजाया गया और अख़बारों में बड़े-बड़े विज्ञापन दिए गए.

मुख्य समारोह मुख्यमंत्री के सरकारी बंगले पर हुआ जिसे इस मौक़े के लिए विशेष रूप से फूलों और रोशनी से सजाया गया.

समारोह में मंत्रीगण और सरकार के आला अफ़सर मौजूद थे. गुलाबी रंग के सलवार सूट और कोट में मायावती आईं तो स्कूली बच्चियों ने उनकी आरती उतारी और फिर नाच गाकर बधाई दी.

चकाचौंध

बिजली यंत्र से घूम रहे एक खंभे पर चार हाथियों की मूर्तियाँ लगी थीं और उनके ऊपर चारों ओर मायावती के चार चित्र. बिजली की चकाचौंध रोशनी से माहौल जादुई लग रहा था.

मायावती के जन्मदिन पर पिछले साल चंदा वसूली को लेकर एक इंजीनियर की हत्या को लेकर पिछले साल बावेला मचा था.

समारोह का संचालन कर रहे मुख्य सचिव अतुल गुप्ता ने इसे पावन दिवस की संज्ञा देते हुए बताया कि इस बार मुख्यमंत्री का जन्मदिन जन कल्याणकारी दिवस के रूप मनाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री ने जनता के ही पैसे से जनता को तोहफों का ऐलान किया. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर 7312 करोड़ रुपयों की 264 सड़क, भवन और पुल जैसी परियोजनाओं का उदघाटन और शिलान्यास किया.

उन्होंने ग़रीबों के लिए 300 रुपया महीना महामाया ग़रीब आर्थिक मदद योजना शुरू की. योजना से 30 लाख ग़रीबों को लाभ मिलेगा.

घोषणाएँ

मायावती के राजनीतिक गुरु कांशी राम ने एक बार उन्हें 'यूपी की महारानी' कहकर संबोधित किया था और उसको सही साबित करते हुए मायावती ने अपने जन्मदिन पर 26 हज़ार विचाराधीन बंदियों को रिहा करने की भी घोषणा की.

Image caption ख़ूब धूमधाम से मना मायावती का जन्मदिन

उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़रनामा पुस्तक के पाँचवें खंड का विमोचन भी इसी मौक़े पर किया. यह 1100 पृष्ठ की किताब है जो नीले कवर में छपती है और इसीलिए इसे 'बीएसपी की ब्लू बुक' कहा जाता है.

बताया जाता है कि मायावती हर रोज़ अपने संस्मरण लिखती हैं, जो बाद में पुस्तक के रूप में प्रकाशित होते हैं.

समारोह में आए मेहमानों के लिए भोजन का विशेष प्रबंध था, लेकिन सूर्य ग्रहण शुरू हो जाने के कारण ज़्यादातर लोग बिना खाए-पिए चले गए.

मै बंगले से बाहर कालिदास मार्ग चौराहे पर आया तो देखा बड़ी तादाद में लोग इधर-उधर भटक रहे थे.

पुलिस इन्हें मुख्यमंत्री बंगले की तरफ़ जाने नही दे सकती थी. ये मायावती के जन्मदिन समारोह में शामिल होने लखनऊ आए थे इस उम्मीद से कुछ आर्थिक लाभ मिलेगा.

'फ़ायदा नहीं'

बख़्शी तालाब से आईं गीता और उसके साथ आए लोगों को शिकायत थी कि उन्हें अब तक माया सरकार से कोई फ़ायदा नहीं मिला है.

यह लोग इंदिरा आवास और दूसरी योजनाओं में लाभ, कंबल और कुछ नकद धन की मदद चाहते थे.

लेकिन इनकी बात सुनाने वाला भी कोई नही है. मायावती ने जनता दर्शन भी बंद कर दिया है और कोई ग़रीब या आम आदमी उनसे मिलकर अपनी तकलीफ़ भी नही बता सकता.

पार्टी नेता इस भीड़ को लेकर बहुजन समाज पार्टी दफ़्तर ले गए. मुख्यमंत्री मायावती अपना जन्मदिन मनाने वहाँ भी पहुंचीं.

इसी बीच मैंने प्यारेलाल नाम के एक रिक्शा चालक को देखा, जो मुख्यमंत्री आवास से बैटरी चालित नया साइकिल रिक्शा पैदल घसीटते आ रहे हैं.

प्यारे लाल को यह रिक्शा अपना रिक्शा योजना में मिला है, जिसमें कुछ सरकार अनुदान है और बाक़ी वह क़र्ज़ के तौर पर चुकाएँगे.

आलोचना

विधान सभा में नेता विरोधी दल शिवपाल यादव ने बाद में एक प्रेस कांफ्रेंस करके कटाक्ष किया कि मुख्यमंत्री अपना जन्मदिन भी सरकारी पैसे से मना रही हैं.

Image caption मायावती ने कई घोषणाएँ की

शिवपाल का कहना था कि किसानों को सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिल रही है लेकिन उनके जन्मदिन पर राजधानी रोशनी से नहाई हुई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार जन्मिदन पर खुले आम चंदा भले ही वसूला गया हो, लेकिन चीनी और शराब उद्योग से सीधे वसूली हो रही है.

उन्होंने इन आरोपों की जाँच सीबीआई से कराने की मांग की. लेकिन आम आदमी या विपक्ष कुछ भी कहे मायावती पर उसका कोई असर नही पड़ता.

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