लाखों ने अंतिम विदाई दी बसु को

  • 19 जनवरी 2010
ज्योति बसु
Image caption ज्योति बसु लगातार 23 वर्ष तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत ज्योति बसु की अंतिम यात्रा में लाखों लोगों ने उन्हें नम आँखों से विदाई दी.

दिवंगत नेता की अंतिम यात्रा मंगलवार सुबह साढ़े सात बजे 'पीस ऑफ़ हेवन' नामक शव गृह से शुरू हुई. इसके बाद उन्हें अलीमुद्दीन स्ट्रीट स्थित पार्टी मुख्यालय ले जाया गया.

आख़िर में उनका पार्थिव शरीर अस्पताल में ले जाकर दान कर दिया गया.

ज्योति बसु अपना शरीर दान कर चुके थे इसलिए उनका अंतिम संस्कार नहीं होगा.

वर्ष 1977 से 2000 तक लगातार 23 साल तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु का 95 साल की उम्र में रविवार को निधन हो गया था.

प्रभावशाली नेता

ज्योति बसु के निधन के बाद पूरे पश्चिम बंगाल में शोक की लहर है.

अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान उन्होंने जो भूमि सुधार को लागू किया इस वजह से उन्हें काफ़ी प्रतिष्ठा मिली. वे देश के सबसे प्रतिष्ठित मार्क्सवादी नेता थे.

1996 में उन्हें प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव मिला था लेकिन पार्टी के निर्णय की वजह से उन्होंने यह पद ठुकरा दिया था.

पार्टी मुख्यालय के बाद ज्योति बसु की अंतिम यात्रा का अगला पड़ाव पश्चिम बंगाल विधानसभा था जहां इसे जनता के दर्शनार्थ रखा गया.

इसके बाद पार्थिव शरीर को मोहर कुंज ले जाया गया जहाँ उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर के रूप में अंतिम विदाई दी गई.

यह यात्रा दक्षिण कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल में समाप्त हुई जहाँ उनका शरीर अस्पताल को सौंप दिया गया.

श्रद्धांजलि

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत अनेक वरिष्ठ नेताओं ने दिवंगत मार्क्‍सवादी नेता ज्योति बसु को श्रद्धांजलि दी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज्योति बसु को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा, "आज़ाद भारत के वे सबसे काबिल प्रशासक और राजनेता थे. मैं हमेशा सलाह मशविरे के लिए उनके पास जाता रहा."

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि बसु न सिर्फ़ भारत के बल्कि दक्षिण एशिया के एक कद्दावर नेता थे.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शोक संदेश मे कहा, "उनकी मौत के साथ ही देश की राजनीति के एक अध्याय का अंत हो गया."

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