सुप्रीम कोर्ट ने की ख़ुशबू की खिंचाई

  • 20 जनवरी 2010
ख़ुशबू
Image caption तमिलनाडु में उनके प्रशंसक देवी की तरह पूजते भी रहे

सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेत्री ख़ुशबू के उस बयान की निंदा की है जिसमें उन्होंने विवाह के पहले यौन संबंध बनाने का समर्थन किया था.

फ़िल्मों में अभिनय करने के लिए दक्षिण भारत को अपना घर बना चुकीं ख़ुशबू पर इस बयान के लिए मुक़दमा चल रहा है क्योंकि वहाँ लोगों को लगा कि यह बयान अभद्र है.

इन मुक़दमों को ख़ारिज करने के लिए ख़ुशबू ख़ुद सुप्रीम कोर्ट पहुँची हैं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने उनकी अपील पर हमदर्दी दिखाने से इनकार करते हुए कहा, "ऐसी बात को स्वीकार नहीं किया जा सकता".

उन्होंने कहा, "हम इस तर्क को स्वीकार नहीं कर सकते कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है."

विवादास्पद बयान

ख़ुशबू अब एक लोकप्रिय टेलीविज़न होस्ट भी हैं. वर्ष 2005 में उन्होंने एक पत्रिका को दिए गए बयान में कहा था, "मेरी दृष्टि में विवाह पूर्व यौन संबंध बनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके लिए सारी सावधानियाँ बरतनी चाहिए."

इसी साक्षात्कार में उन्होंने यह भी कहा था, "किसी भी पढ़े लिए युवक के लिए यह उम्मीद करना ठीक नहीं है कि उसकी पत्नी की कौमार्यता सुरक्षित होगी."

ख़ुशबू का यह बयान परंपरागत और रुढ़िवादी भारतीय समाज को नागवार गुज़रा था.

कुछ तमिल राष्ट्रवादी राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने ख़ुशबू के इस बयान का विरोध करते हुए कहा था कि यह तमिल संस्कृति के ख़िलाफ़ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी है.

इस बयान के ख़िलाफ़ तमिलनाडु की कई अदालतों में भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत कई मुक़दमे दायर किए गए थे.

अगर उन्हें दोषी पाया जाता है तो उन्हें जेल की सज़ा हो सकती है.

बाद में मानवाधिकार कार्यकर्ता और महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्थाएँ भी इस विवाद में कूद पड़ी थीं और कहा था कि ख़ुशबू के ख़िलाफ़ दायर किए गए मुक़दमे उन्हें प्रताड़ित करने का प्रयास हैं और यह उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन भी है.

ख़ुशबू अपने बयान का बचाव करते हुए कहती रहीं हैं कि वे लैंगिग समानता और समाज में औरतों के स्थान के बारे में अपने व्यक्तिगत विचार व्यक्त कर रही थीं.

उनका कहना है कि उनका उद्देश्य किसी भी तरह से तमिल समाज की परंपराओं और संस्कृति का अपमान करना नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट ने अब उनसे कहा है कि वे दो हफ़्तों के भीतर विवादास्पद साक्षात्कार की पूरी प्रति उपलब्ध करवाएँ.

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