प्रीपेड मोबाईल सेवा पर रोक हटी

Image caption प्रतिबंध का असर लाखों प्रीपेड मोबाईल उपभोक्ताओं पर पड़ा था.

भारतीय दूरसंचार विभाग ने जम्मू-कश्मीर में प्री-पेड मोबाईल सेवाओं पर तीन महीने से चल रहे प्रतिबंध को फ़ौरन हटाने का एलान किया है.

भारत सरकार ने ये कहकर ये प्रतिबंध लगाया था कि इस सेवा से चरमपंथी गुटों को फ़ायदा पहुंच रहा था.

इस प्रतिबंध का राज्य में काफ़ी विरोध हुआ था क्योंकि वहां लगभग 38 लाख लोग प्री-पेड मोबाईल सेवा का इस्तेमाल कर रहे थे.

जम्मू से बीबीसी संवाददाता बीनू जोशी का कहना है कई चरमपंथियों ने गलत पहचान बता कर ढेरों सिम कार्ड खरीद लिए थे और उनका इस्तेमाल चरमपंथी हमलों के दौरान दिशानिर्देश के लिए करते थे.

प्रतिबंध हटाने के आदेश के साथ ही सरकार ने प्री-पेड सिम कार्ड जारी करने से पहले उपभोक्ताओं के नाम, पते और पहचान की और सख़्त जांच के आदेश दिए हैं.

उपभोक्ताओं को अपनी पहचान स्थापित करने के लिए ठोस प्रमाण लाने होंगे.

भारत संचार निगम लिमिटेड के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया, ``इन प्रमाणों की जांच की पूरी जवाबदेही सेवा मुहैया करवानेवाले की होगी और अगर कोई इसका उल्लंघन करता पाया गया तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी.’’

श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि पूरे राज्य में इस फ़ैसले का स्वागत हुआ है.

श्रीनगर में मोबाईल बिजनेस से जुड़े व्यापारी इरफ़ान अंसारी ने फ़ैसले का स्वागत किया लेकिन साथ ही उनका कहना था: ``प्रतिबंध लगाने से बिना वजह ही लोगों को परेशानी उठानी पड़ी.’’

उनका कहना था, ``इस प्रतिबंध से लोगों की भावनाओं को जो ठेस पहुंची उसकी भरपाई नहीं हो सकती. अभी भी माहौल अनिश्चितता का ही है क्योंकि सबकुछ दिल्ली में बैठे अधिकारियों की मर्ज़ी से चलता है.’’

कश्मीर चैंबर्स ऑफ़ इंडस्ट्री ऐंड कॉमर्स के अध्यक्ष नज़ीर अहमद ने सरकार के फ़ैसले का स्वागत किया है.

उनका कहना था, ``मुझे खुशी है कि सरकार को ये एहसास हुआ कि प्रतिबंध का फ़ैसला ग़लत था और जिस तरह से पोस्ट-पेड मोबाईल सेवा की जांच होती है उसी तरह की जांच प्रीपेड के लिए भी करने का निर्णय सही है.’’

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