भारत ने स्वैच्छिक कटौती का लक्ष्य सौंपा

  • 31 जनवरी 2010
जलवायु परिवर्तन
Image caption भारत ने फिर दोहराया कि वो किसी क़ानूनी बाध्यता को नहीं मानेगा.

भारत ने कार्बन उत्सर्जन तीव्रता में वर्ष 2020 तक 20 से 25 फ़ीसदी कटौती के लक्ष्य का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया है.

कोपेनहेगन सम्मेलन में ये तय हुआ था कि सभी देश 31 जनवरी तक कटौती से संबंधित लक्ष्य के बारे में सूचित करेंगे.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र प्रारुप सम्मेलन (यूएनएफ़सीसीसी) को दी गई सूचना में भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उत्सर्जन में कटौती का लक्ष्य उसने स्वेच्छा से तैयार किया है और ये किसी क़ानूनी बाध्यता के दायरे में नहीं है.

पर्यावरण मंत्रालय ने शनिवार को जारी व्यक्तव्य में कहा है, "भारत पूरी कोशिश करेगा कि 2005 के आधार पर वर्ष 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में 20 से 25 फ़ीसदी कटौती की जाए."

भारत ने इसी महीने बेसिक देशों (ब्राज़ील, दक्षिण अफ़्रीका, चीन और भारत) की बैठक दिल्ली में बुलाई थी जिसमें स्वैच्छिक कटौती की सीमा 30 जनवरी तक घोषित करने पर सहमति बनी थी.

अमरीका और यूरोपीय संघ ने भी उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य सौंप दिया है. अमरीका ने 2020 तक वर्ष 2005 की तुलना में 17 फ़ीसदी कौटती का प्रस्ताव दिया है. लेकिन साथ ही ये भी कहा है कि इस लक्ष्य पर अमल घेरलू क़ानून पारित होने के बाद ही शुरु होगा.

यूरोपीय संघ ने भी कोपेनहेगन में व्यक्त की गई प्रतिबद्धता के अनुरुप 1990 के स्तर से वर्ष 2020 तक 20 फ़ीसदी कटौती का वचन दिया है.

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